
धर्म डेस्क। विश्वप्रसिद्ध और 75 दिनों तक चलने वाले ऐतिहासिक बस्तर दशहरा के पावन अवसर पर जन-आस्था का अलौकिक दृश्य देखने को मिल रहा है। बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की छत्र और मां मावली की पावन डोली सोमवार सुबह जगदलपुर पहुंच चुकी हैं।
दोनों दिव्य विग्रहों को शहर की सीमा पर स्थित गीदम रोड स्थित 'जिया डेरा' में आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ विराजमान किया गया है, जहां तड़के से ही जगदलपुर और आसपास के ग्रामीण अंचलों से हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है।
पूर्व काल में दंतेवाड़ा स्थित मुख्य शक्तिपीठ से मां दंतेश्वरी की छत्र और मां मावली की डोली 3 दिनों की पैदल पदयात्रा के बाद जगदलपुर पहुंचती थी। वर्तमान में सुरक्षा और समय को देखते हुए यह यात्रा वाहनों के माध्यम से कुछ घंटों में पूरी कर ली जाती है।
यद्यपि यात्रा का साधन बदल गया है, परंतु दंतेवाड़ा से जगदलपुर के मार्ग में पड़ने वाले सभी पारंपरिक देवी स्थानों और देव-गुड़ियों में विधिवत पूजा-अर्चना करने की प्राचीन परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ कायम है।
बस्तर दशहरा के सबसे महत्वपूर्ण और भावुक विधानों में से एक 'मावली परघाव' (देवी मावली और दंतेश्वरी के स्वागत और अगवानी की परंपरा) आज मंगलवार को भव्य रूप से निभाई जाएगी:
जिया डेरा में श्रद्धालुओं के सुलभ दर्शन हेतु पुलिस प्रशासन और बस्तर दशहरा समिति द्वारा सुरक्षा और यातायात की व्यापक व्यवस्था की गई है। मावली परघाव की रस्म के पश्चात् मां दंतेश्वरी की छत्र और मावली की डोली को गाजे-बाजे के साथ राजमहल स्थित दंतेश्वरी मंदिर में आदरपूर्वक प्रवेश कराया जाएगा।