
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। इस बार दीपोत्सव पांच नहीं, बल्कि छह दिन का होगा। इसकी शुरुआत छह नवंबर को धनतेरस से होगी और समापन 11 नवंबर को भाई दूज के साथ होगा। दरअसल, इस बार कार्तिक अमावस्या तिथि दो दिन तक रहने और सोमवार को सोमवती अमावस्या का संयोग बनने के कारण दीपोत्सव के पारंपरिक आयोजनों के बीच एक दिन अतिरिक्त जुड़ गया है। सात नवंबर को नरक चतुर्दशी, आठ नवंबर को दीपावली पर लक्ष्मी पूजन, नौ नवंबर को सोमवती अमावस्या, दस नवंबर को गोवर्धन पूजा और 11 नवंबर को भाई दूज मनाई जाएगी।
धनतेरस के अगले दिन सात नवंबर, शनिवार को नरक चतुर्दशी यानी छोटी दीपावली मनाई जाएगी। कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि सात नवंबर को सुबह 10 बजकर 55 मिनट से शुरू होकर आठ नवंबर को सुबह 11 बजकर दो मिनट तक रहेगी। इस दिन घरों में पांच, 11 या 21 दीपक जलाने की परंपरा है। मान्यता है कि दीपदान से नकारात्मकता दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
दीपोत्सव का प्रमुख पर्व दीपावली आठ नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष की प्रदोष और निशीथ व्यापिनी अमावस्या के साथ स्वाति नक्षत्र, आयुष्मान और सौभाग्य योग का संयोग रहेगा। स्थिर लग्न में माता महालक्ष्मी, महासरस्वती, भगवान गणेश और कुबेर का पूजन किया जाएगा।
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार स्वाति 27 नक्षत्रों में 15वां नक्षत्र है और इसका स्वामी राहु है। इसे स्वतंत्रता, गतिशीलता और प्रगति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस नक्षत्र में किए गए शुभ कार्य विशेष फलदायी होते हैं। आयुष्मान योग दीर्घायु और आरोग्यता, जबकि सौभाग्य योग सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
अमावस्या तिथि आठ नवंबर को सुबह 11 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर नौ नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 54 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। वृषभ लग्न शाम छह बजकर 24 मिनट से रात आठ बजकर 24 मिनट तक रहेगा। निशिता काल का मुहूर्त रात 11 बजकर 53 मिनट से नौ नवंबर की रात 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगा।
अमावस्या तिथि सोमवार को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहने के कारण नौ नवंबर को सोमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है। इस दिन महिलाएं तुलसी माता की परिक्रमा कर पूजा-अर्चना करेंगी। सामान्य तौर पर दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा होती है, लेकिन इस बार अमावस्या तिथि की अवधि के कारण गोवर्धन पूजा एक दिन आगे बढ़ेगी। यही वजह है कि दीपोत्सव में एक दिन अतिरिक्त जुड़ गया है।
कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि नौ नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट से शुरू होकर दस नवंबर को दोपहर दो बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार गोवर्धन पूजा दस नवंबर, मंगलवार को होगी। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 40 मिनट से 8 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।
दीपोत्सव का अंतिम पर्व भाई दूज 11 नवंबर, बुधवार को मनाया जाएगा। द्वितीया तिथि दस नवंबर को दोपहर दो बजे से शुरू होकर 11 नवंबर को दोपहर 3 बजकर 53 मिनट तक रहेगी। इस दिन बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु, सुख और समृद्धि की कामना करेंगी