यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 10, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
देवी मंदिर में जंगली भालू भी करते हैं परिक्रमा, हाथों से खाते हैं प्रसाद
शक्ति चंडी माता के दरबार में आदमी ही नहीं पहुंचते बल्कि जंगली जानवर भालू भी भक्ति का भाव लिए पहुंचते हैं।
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Publish Date: Sun, 10 Apr 2016 08:23:31 PM (IST)Updated Date: Mon, 11 Apr 2016 07:45:14 AM (IST)

बागबाहरा (छत्तीसगढ़)। बागबाहरा नगर से पांच किलोमीटर दूर घुंचापाली पहाड़ी में स्थित आदि शक्ति चंडी माता के दरबार में आदमी ही नहीं पहुंचते बल्कि जंगली जानवर भालू भी भक्ति का भाव लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में सूरज ढलते ही भालुओं का एक झुंड माता की संध्या आरती के समय अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। जब श्रद्धालु मंदिर की परिक्रमा करते हैं तो भालू भी उनका अनुशरण करते हुए पीछे चलते हैं।
भालुओं के झुंड का मंदिर पहुंचने का यह सिलसिला रोजाना सुबह-शाम अनवरत रूप से पिछले कई वर्षों से जारी है। जो आरती होने तक परिसर में रहकर प्रसाद ग्रहण करने के बाद अपने मांद की ओर निकल जाते हैं। इन भालुओं को बच्चे, बड़े, बुजुर्ग बड़े चाव से अपने हाथों से प्रसाद खिलाते हैं, लेकिन भालुओं ने कभी किसी पर हमला नहीं किया है। नवरात्र पर रविवार को श्रद्धालुओं ने भालू को प्रसाद खिलाया।
चंडी मंदिर के पंडित तुकेश्वर तिवारी व अन्नू महाराज बताते हैं कि भालुओं का निरंतर आरती के समय पहुंचना, आरती तक मंदिर परिसर के चारों ओर परिक्रमा करना तथा प्रसाद ग्रहण कर अपने आप चले जाना यह सब माता की कृपा है। पूर्व में नाग का दर्शन यहां आने वाले भक्तों को होता है। धार्मिक आस्था के अनुसार नागदेवता का नवरात्र में दर्शन शुभ व फलदायी माना जाता है।
नाग देवता पूरे पहाड़ी क्षेत्र मे विचरण करते हैं। पर आज तक कभी किसी को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुचाया है। चंडी मंदिर समिति अध्यक्ष लालचंद जैन का कहना है कि भालुओं के मंदिर पहुंचने पर उसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है। सुरक्षा के लिए चेतावनी बोर्ड के साथ ही जाली का घेरा लगाकर रखे हैं। भालुओं लगातार जनमानस के संपर्क में आकर उनके हाथों से फल, प्रसाद व अन्य खाद्य सामग्री खाकर झिझक खत्म हो चुका है।
मन मोह लेता है सुरम्य वातावरण
आसुरी शक्तियों व प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा करने वाली मां चंडी देवी का मंदिर प्राकृतिक रूप से जंगल व पहाड़ियों से आच्छादित है। यहां का सुरम्य वातावरण मन को मोह लेता है। श्रद्धालु यहां आकर सुखद अनुभूति का अनुभव करते हैं। प्राकृतिक रूप से स्वमेव अवतरित मां चंडी देवी पहाड़ी पर विराजमान हैं। मां की प्रतिमा दक्षिणमुखी होने से शास्त्रों के अनुसार विशेष महत्व रखती है। स्वनिर्मित आदिशक्ति मां की प्रतिमा को चंडी माता के रूप में आराधना की जाती है।