रतलाम के महालक्ष्मी के दरबार में कुबेर पोटली का वितरण आज से, धन-वैभव की अनूठी सजावट
मान्यता है कि मां के दरबार में सामग्री अर्पित करने से वर्षभर व्यापार में उन्नति होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। कई श्रद्धालु सामग्री जमा कराने के बाद नोटों की गड्डियां या अन्य राशि वापस मिलने पर उसे अपनी तिजोरी में सुरक्षित रखते हैं।
Publish Date: Fri, 06 Nov 2026 01:16:32 PM (IST)Updated Date: Fri, 06 Nov 2026 01:17:15 PM (IST)
रतलाम के माणकचौक मंदिर में महालक्ष्मीजी की मूर्ति।HighLights
- सुबह आरती के बाद कुबेर पोटली का वितरण शुरू किया जाएगा।
- इस बार पांचों दिन पोटली वितरित करने की व्यवस्था बनाई गई है।
- धन-वैभव से की गई सजावट को निहारने दूर-दूर से आ रहे श्रद्धालु।
नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम। देशभर में अपनी अनूठी शृंगार परंपरा के लिए प्रसिद्ध माणकचौक स्थित महालक्ष्मी मंदिर में शुक्रवार धनतेरस से पांच दिवसीय दीपोत्सव की धूम प्रारंभ हो गई है। दर्जनों सेवादारों द्वारा मंदिर परिसर में धन-वैभव से अनूठी सजावट की गई है। अब धनतेरस से शुरू मंदिर आने वाले भक्तों को कुबेर पोटली का वितरण किया जाएगा।
मंदिर में करीब 450 से अधिक श्रद्धालुओं ने सामग्री जमा कराई हैं। नकदी में एक से लेकर 500 रुपये के नोटों की गड्डियों के साथ पुराने एंटिक नोट भी दिए गए हैं। मंदिर के अश्विन पुजारी ने बताया कि दीपोत्सव के दौरान धनतेरस पर सुबह पांच बजे आरती के बाद कुबेर पोटली का वितरण शुरू किया जाएगा।
इस बार पांचों दिन पोटली वितरित करने की व्यवस्था बनाई गई है। लाल वस्त्र में दी जाने वाली कुबेर पोटली में मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने और उन्हें अर्पित की जाने वाली सामग्री रखी जाती है। इसमें कमलगट्टा, कौड़ी, चावल, सुपारी, पिस्ता और गोमती चक्र शामिल हैं।
मान्यता है कि मां के दरबार में सामग्री अर्पित करने से वर्षभर व्यापार में उन्नति होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। कई श्रद्धालु सामग्री जमा कराने के बाद नोटों की गड्डियां या अन्य राशि वापस मिलने पर उसे अपनी तिजोरी में सुरक्षित रखते हैं।
महालक्ष्मी नारायण मंदिर में भी सजावट पूरी
- कालिका माता मंदिर के समीप स्थित महालक्ष्मी नारायण मंदिर में भी इस वर्ष नोटों की सजावट की गई है। भक्तों द्वारा दी जाने वाली नकदी से पूरे मंदिर परिसर में विशेष शृंगार किया गया है।
- इसके साथ ही बाहरी परिसर में भी साज-सज्जा की गई है।
- मंदिर पुजारी असीम व्यास, दीपक व्यास ने बताया कि भाईदूज के बाद भक्तों को सामग्री वापस लौटाई जाएगी। शृंगार के लिए सिर्फ नकदी ही ली गई है।
- सुरक्षा कारणों से जेवर आदि नहीं लिए गए। पांच दिवसीय दीपोत्सव के दौरान मंदिर पर विशेष कार्यक्रम भी होंगे।
- मंदिर में स्थापित मूर्ति में शेषनाग पर बैठे गरूड़जी ने कंधे पर विष्णु भगवान को उठा रखा है और विष्णु भगवान की गोद में मां महालक्ष्मी विराजित हैं।
- यह मंदिर रियासतकालीन होकर करीब 350 वर्ष पुराना है।
- मंदिर का प्राचीन ऐतिहासिक महत्व होने से यहां देशभर से श्रद्धालु आते हैं और मनोकामना पूर्ण करने के लिए मन्नत भी मांगते हैं।