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Diwali 2026 Date: धन तेरस, दीपावली किस दिन है, नोट करें पांच दिनों का कैलेंडर

यह पांच दिन का पर्व होता है। शुरुआत धन तेरस से होती है। इसके बाद नरक चौदस आती है। फिर दीपावली। अगले दिन पड़वा और उसके बाद भाई दूज। 2026 में दीपावली सह...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Mon, 19 Oct 2026 12:34:36 PM (IST)Updated Date: Mon, 19 Oct 2026 01:23:13 PM (IST)
Diwali 2026 Date: धन तेरस, दीपावली किस दिन है, नोट करें पांच दिनों का कैलेंडर
दीपावली 2206 का शेड्यूल।

HighLights

  1. हिंदू धर्म में दीपावली को सबसे बड़ा त्‍योहार माना जाता है।
  2. यह पांच दिनों के विविध त्‍योहारों की एक श्रृंखला होती है।
  3. सभी का अपना महत्‍व है। सभी की अपनी एक कहानी है।

धर्म डेस्‍क। हिंदू धर्म में दीपावली सबसे बड़ा त्योहार है। यह हर साल हिंदू महीने कार्तिक की अंधेरी अमावस्या की रात (अमावस्या) को मनाया जाता है, जो आमतौर पर अक्टूबर के बीच और नवंबर के बीच पड़ता है। इसे उत्‍साह, उजाले, खुशियों और मिठास का पर्व माना जाता है। यह पांच दिन का पर्व होता है। शुरुआत धन तेरस से होती है। इसके बाद नरक चौदस आती है। फिर दीपावली। अगले दिन गोवर्धन पूजा पड़वा और उसके बाद भाई दूज। 2026 में दीपावली सहित पूरे पांच दिनों के पर्व किस दिन हैं, आइये जानते हैं।

दिवाली के पांच दिनों का कैलेंडर (2026)

दिन 1: धनतेरस (शुक्रवार, 6 नवंबर, 2026)

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इसे धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है

महत्व: लोग धन और समृद्धि के लिए देवी लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करते हैं और सोना, चांदी या नए बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।

दिन 2: नरक चतुर्दशी, रूप चौदस (शनिवार, 7 नवंबर, 2026)

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इसे नरक चतुर्दशी, रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है

महत्व: भगवान कृष्ण की राक्षस नरकासुर पर विजय का प्रतीक है। परंपराओं में भोर से पहले तेल स्नान (अभ्यंग स्नान) और दीपक जलाना शामिल है।

दिन 3: मुख्य दिवाली और लक्ष्मी पूजा (रविवार, 8 नवंबर, 2026)

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इसे दीपावली के नाम से भी जाना जाता है

महत्व: प्राथमिक त्योहार का दिन. घरों को दीयों (मिट्टी के तेल के लैंप) और रंगोली से सजाया जाता है, और परिवार शाम को लक्ष्मी-गणेश पूजा करते हैं।

दिन 4: गोवर्धन पूजा (सोमवार, 9 नवंबर, 2026)

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इन्हें अन्नकूट, बाली प्रतिपदा (दक्षिण/पश्चिम में) के नाम से भी जाना जाता है।

महत्व: भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने का स्मरण करते हुए बड़े पैमाने पर भोजन प्रसाद (अन्नकूट) और क्षेत्रीय नए साल के जश्न (जैसे गुजराती नव वर्ष) की तैयारी की जाती है।

दिन 5: भाई दूज (मंगलवार, 10 नवंबर, 2026)

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इसे भाऊ बीज, यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है

महत्व: भाइयों और बहनों के बीच के बंधन का जश्न मनाता है, जहां बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाती हैं और उनके लंबे जीवन और कल्याण के लिए प्रार्थना करती हैं।