
धर्म डेस्क। सनातन धर्मावलंबियों का प्रमुख पर्व दीपोत्सव इस बार छह दिनों तक मनाया जाएगा। तीन साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है, जब अमावस्या तिथि दो दिन रहने के कारण दीपोत्सव की अवधि पांच के बजाय छह दिन की होगी। धनतेरस से शुरू होने वाला दीपोत्सव भाई दूज तक चलेगा। इस दौरान धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली सहित सभी प्रमुख पर्व परंपरागत उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाए जाएंगे। आठ नवंबर रविवार को स्वाति नक्षत्र, आयुष्मान और सौभाग्य योग के विशेष संयोग में दीपावली का पर्व मनाया जाएगा।
कार्तिक कृष्ण पक्ष की प्रदोष व्यापिनी त्रयोदशी तिथि पर छह नवंबर शुक्रवार को धनतेरस के साथ दीपोत्सव का शुभारंभ होगा। त्रयोदशी तिथि छह नवंबर को सुबह 11 बजकर 18 मिनिट से शुरू होकर सात नवंबर शनिवार को सुबह 10 बजकर 55 मिनिट तक रहेगी। धनतेरस को धन, सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि का पर्व माना जाता है।
इस दिन सोना-चांदी, आभूषण, रत्न, भूमि-भवन, वाहन, वस्त्र और बर्तनों की खरीदारी करना शुभ माना जाता है।घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भगवान धन्वंतरि के साथ माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, कुबेर और मां सरस्वती का पूजन किया जाएगा।
सुख-समृद्धि, आरोग्यता और धन-वैभव की कामना के साथ भगवान धन्वंतरि की आराधना होगी। वहीं अकाल मृत्यु, रोग और शोक से मुक्ति की कामना करते हुए यमराज के निमित्त घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तेल का दीपक जलाया जाएगा। गोधूलि बेला में पंचदेव के निमित्त पांच घी के दीपक जलाने की भी परंपरा है।
कार्तिक कृष्ण पक्ष की प्रदोष व्यापिनी चतुर्दशी तिथि पर सात नवंबर शनिवार को नरक चतुर्दशी, छोटी दीपावली और ह जाएगी। चतुर्दशी तिथि सात नवंबर को सुबह 10 बजकर 55 मिनिट से आठ नवंबर को सुबह 11बजकर दो मिनिट तक रहेगी। इस दिन घरों में पांच, 11 या 21 दीपक जलाने की परंपरा है। मान्यता है कि दीपदान करने से नकारात्मकता दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
दीपोत्सव का सबसे प्रमुख पर्व दीपावली आठ नवंबर रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष की प्रदोष और निशीथ व्यापिनी अमावस्या के साथ स्वाति नक्षत्र, आयुष्मान और सौभाग्य योग का विशेष संयोग रहेगा।
दीपावली पर स्थिर लग्न में माता महालक्ष्मी, महासरस्वती, विघ्नहर्ता भगवान गणेश और कुबेर का विधि-विधान से पूजन किया जाएगा। श्रद्धालु धन, वैभव, सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की कामना के साथ दीप प्रज्ज्वलित करेंगे।ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार स्वाति नक्षत्र 27 नक्षत्रों की श्रेणी में 15वां नक्षत्र है और इसका स्वामी राहु है।
इस नक्षत्र को स्वतंत्रता, गतिशीलता और प्रगति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि स्वाति नक्षत्र में किए गए शुभ कार्य विशेष फलदायी होते हैं। जिस प्रकार स्वाति नक्षत्र में वर्षा की बूंद सीप में गिरकर मोती बनने की मान्यता से जुड़ी है, उसी प्रकार इस नक्षत्र में किए गए कार्यों में सफलता और उन्नति की कामना की जाती है।
आयुष्मान योग को दीर्घायु और आरोग्यता से, जबकि सौभाग्य योग को सुख-समृद्धि और शुभ फल से जोड़कर देखा जाता है। इस कारण दीपावली पर इन दोनों योगों का संयोग विशेष महत्व रखेगा।
दीपावली के दूसरे दिन गोर्वधन पूजा की जाती है, लेकिन इस बार अमावस्या होने के कारण इस दिन सोमवती अमावस्या मनाई जायेगी और इस दिन महिलाएं माता तुलसी की परिक्रमा करेंगीं।
10 नवंबर मंगलवार को विधि-विधान के साथ गोवर्धन पूजन की जायेगी।इसके साथ ही नगर में अन्नकूट के आयोजनों का सिलसिला शुरू हो जायेगा।
11 नवंबर को भाई दूज- इस वर्ष भाई दूज दीपोत्सव के छठवें दिन मनाई जायेगी। बहने भाइयों को सौभाग्य का तिलक करेंगीं। इसी के सात ही छह दिवसीय दीपोत्सव का समापन होगा।