
मल्टीमीडिया डेस्क। भगवान भोलेनाथ की आराधना का महीना सावन शनिवार, 28 जुलाई शुरू हो रहा है। इस दौरान पूरे देशभर में शिवभक्ति की लहर रहेगी और हर कोई शिवजी को प्रसन्न करने के लिए हर संभव प्रयास और पूजा करेगा।
सावन महादेव का प्रिय माह है, इसीलिए इन दिनों में सभी शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगी रहती है। अगर आप भी शिवजी को प्रसन्न करना चाहते हैं तो पूजा-पाठ के साथ ही कुछ और बातों का भी ध्यान रखें। इस दौरान कुछ ऐसे काम हैं, जो वर्जित बताए गए हैं, जानते हैं उसके बारे में।
सावन माह में सुबह देर तक सोने से बचें। सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल जरूर चढ़ाएं। सावन में लोगों को दूध पीने से मना किया जाता है क्योंकि इससे पित्त बनने लगता है। वहीं शिवलिंग पर दूध चढ़ाया जाता है क्योंकि वह विष का पान करते हैं।
पूरे महीने सात्विक भोजन करना चाहिए। सावन के महीने में मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
कई लोग पूजा करने के बाद शिलिंग की पूरी परिक्रमा करने की गलती कर बैठते हैं, जिससे भगवान शिव का अपमान होता है। अभिषेक करने के बाद कभी भी शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं करनी चाहिए, बल्कि आधी परिक्रमा करनी चाहिए। वरना पूजा का फल नहीं मिलेगा।
शिवलिंग पर हल्दी नहीं चढ़ानी चाहिए। हल्दी स्त्रियों से संबंधित चीज है, इसे जलाधारी पर चढ़ा सकते हैं क्योंकि जलाधारी को माता पार्वती का स्वरूप माना गया है। शिवलिंग पुरुष तत्व का प्रतीक है, इसीलिए इस पर हल्दी न चढ़ाएं।
शिवलिंग पर तुलसी भी नहीं चढ़ानी चाहिए। शिवपुराण के अनुसार शिवजी ने असुर शंखचुड़ का वध किया था। शंखचुड़ का विवाह तुलसी से हुआ था। इसीलिए वजह से तुलसी शिव पूजा में वर्जित मानी गई है।
केतकी के फूल भी शिव पूजन में वर्जित हैं। शिवपुराण के अनुसार प्राचीन काल में केतकी के पौधे ने ब्रह्माजी के एक झूठ में साथ दिया था, तभी से शिवजी की पूजा में ये फूल वर्जित किए गए हैं।
इस महीने में अगर घर के दरवाजे पर सांड या गाय आ आए, तो उसे मारें या भगाएं नहीं। सांड को मारना शिव की सवारी नंदी का अपमान माना जाता है। उसे कुछ खाने के लिए जरूर दें।