मल्टीमीडिया डेस्क। ईद-उल-फितर मुस्लिम धर्मावलंबियों का एक प्रमुख त्यौहार है। इसको रमजान के समापन पर मनाया जाता है। ईद-उल-फितर दो शब्दों से मिलकर बना हुआ शब्द है। ईद और फित्र। पाक महीने रमजान में रोजे रखकर ईबादत की जाती है और नमाज अदा की जाती है। सुबह जल्दी उठकर सेहरी की जाती है और शाम को नमाज अदा करने के बाद इफ्तार का आयोजन किया जाता है। ईद का मुस्लिम धर्म को माने वाले बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं।

ईद-उल-फितर में फितर का मतलब है उन सभी पाबंदियों का त्याग करना जो रमजान के पाक महीने में लगाई गई थी। रमजान के महीने में रोजेदार संयमित दिनचर्या का पालन करते है और खाने -पीने में खास एहतियात बरतते हैं। इसलिए ईद के दिन नए लिबास में महीनेभर के बाद खुशियां मनाई जाती है और जश्न के साथ मीठी सेवईयां, मिठाईयां और सूखे मेवों का लुत्फ उठाया जाता है।

यानी ईद-उल-फितर को इस बात का जश्न मनाया जाता है कि इस दिन माहे रमजान में लगाई गई पाबंदियां खत्म की जाती है। रमजान के दौरान जकात अदा करने की रवायत है। मजलूमों, यतीमों और जरूरतमंदों को जकात दी जाती है। इसका मकसद यह रहता है कि इस हर शख्स के घर में खुशियां आए। वह अपनी हैसियत के हिसाब से ईद का जश्न मनाएं। रमजान के महीने में अकीदत के साथ सख्त उसूलों पर चलकर ईबादत की जाती है और ईद-उल-फितर को खुशियों की सौगात मिलती है।

रमजान के महीने में अल्लाह की रहमत अपने बंदों पर बरसती है वह अपने बंदों पर रहमतों की बारिश करता है। रमजान के महीने में सवाब मिलता है और ईद-उल-फितर के दिन लोग नमाज अदा कर खुदा का शुक्रिया अदा करते हैं। क्योंकि मुस्लिम धर्मावलंबी का मानना है कि खुदा ने उनको रमजान का पाक महीना अता किया, इबादतें करने की तौफीक दी और साथ ही ईद का नायाब तोहफा दिया। इसलिए अकीदतमंद उसके दरबार में पहुंचकर उसका शुक्र अदा करता है।

Posted By: Yogendra Sharma

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