Ganesh Chaturthi 2023: संकष्टी चतुर्थी आज, ऐसे करें भगवान गजानन को प्रसन्न, पूरी होगी हर मनोकामना
मान्यता है कि संकष्टी चतुर्थी व्रत के दिन भगवान गणेश की उपासना करने से मनुष्य के सभी दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं।
By Ravindra Soni
Edited By: Ravindra Soni
Publish Date: Thu, 09 Feb 2023 07:33:15 AM (IST)
Updated Date: Thu, 09 Feb 2023 07:33:15 AM (IST)

भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। हिंदू पंचाग के मुताबिक प्रत्येक मास में दो चतुर्थी तिथियां होती हैं। एक कृष्ण पक्ष और दूसरी शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि। चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित मानी गई है। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन पड़ने वाले व्रत को संकष्टी चतुर्थी व्रत के रूप में जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि संकष्टी चतुर्थी व्रत के दिन भगवान गणेश की उपासना करने से मनुष्य के सभी दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं और व्यक्ति को बल, बुद्धि और ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन चंद्र दर्शन और गणेश पूजा का भी विशेष महत्व माना गया है। इस विशेष दिवस पर महिलाएं अपनी संतान की सुख-समृद्धि, आरोग्यता और दीर्घायु की कामना भगवान गणेश की आराधना करते हुए व्रत रखती हैं। संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय काल में भगवान गणेश के पूजन का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन चंद्रोदय के उपरांत अर्घ्य देकर भगवान गणेश का विधि-विधान से पूजन करने से संतान के सभी कष्टों का निवारण होता है और उस पर आने वाले संकट टल जाते हैं।
शुभ मुहूर्त
फाल्गुन संकष्टी चतुर्थी तिथि 9 फरवरी गुरुवार को सुबह 06 बजकर 23 मिनट से आरंभ होकर 10 फरवरी को सुबह 07 बजकर 58 मिनट तक रहेगी। इस दिन चंद्रोदय का समय रात 09 बजकर 18 मिनट रहेगा। इस दिन शाम को 4 बजकर 46 मिनट पर सुकर्मा योग बन रहा है, जिससे इस व्रत का महत्व और बढ़ जाता है।
महत्व
पुराणों की मानें तो संकटा चौथ के दिन ही भगवान गणेश के जीवन पर सबसे बड़ा संकट आया था। उन्हें हाथी का मस्तक लगाया गया था। संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश का व्रत करने से व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती है। मान्यता है कि संकष्टी चतुर्थी के दिन इसकी कथा सुनने से गणपति की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
पूजन विधि
आज के दिन सूर्योदय से पूर्व ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें। इस दिन पीले या लाल रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। स्नानादि से निवृत्त होने के बाद पूजा स्थल की अच्छे से सफाई करें, फिर लाल रंग के आसन पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। भगवान गणेश के आसन के समक्ष घी का दीप प्रज्ज्वलित करें, उनका सिंदूर से तिलक करें। इसके बाद भगवान को फल-फूल और मोदक व तिल के बने लड्डू का भोग लगाएं। पूजा के दौरान गणेश जी को दूर्वा की 21 गांठें उनके अलग-अलग नाम का उच्चारण करके अर्पित करें। शाम को चंद्रोदय काल में चंद्रदेव को अर्घ्य दें और इसके उपरांत व्रत का पारण करें।
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