ब्यूरो, गया (बिहार)। 17 सितंबर से पितृपक्ष की शुरुआत होने जा रही है। ये 16 दिन पितरों को समर्पित होते हैं। उनकी आत्मा की शांति के लिए पिंड दान और तर्पण किया जाता है।
पिंडदान के लिए इस धरती पर बिहार के गया जी को उत्तम स्थान माना गया है। मान्यता है कि गया जी मोक्ष प्राप्ति का सबसे अच्छा स्थान है। मोक्ष प्राप्ति के लिए यहां किसी तरह के कठोर तप की जरूरत नहीं है।
यहां किया गया किसी भी तरह का कर्मकांड ही मोक्ष प्राप्ति का माध्यम बन जाता है। हर वर्ष पितृपक्ष के दौरान लाखों की संख्या में लोग यहां आते हैं और पिंडदान करते हैं।
पितृपक्ष के दौरान यहां मेले जैसा माहौल रहता है। इस बार भी स्थानीय प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। एक सर्वसुविधायुक्त टेंट सिटी बसाई गई है, जहां 3000 से अधिक श्रद्धालु ठहर सकते हैं।
गया जी में भस्मकूट पर्वत पर मां मंगलागौरी विराजती हैं। इनके अलावा पश्चिम से पूरब तक एक सीध में संकटा माई और चामुंडा देवी मंदिर हैं। ये तीनों गया के प्रसिद्ध मंदिर हैं। वहां जाने वाले हर श्रद्धालुओं को तीनों स्थानों पर दर्शन करना चाहिए।
इनके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग पर शेरघाटी में दुल्हिन मंदिर स्थित है। सरकार ने इसे ऐतिहासिक धरोहर घोषित किया है।