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एक ऐसा व्रत जहां पानी पीना भी है मना! जानें इसके पीछे छिपा धार्मिक रहस्य

14 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल तृतीया के दिन सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं हरतालिका तीज का कठिन निर्जला व्रत रखेंगी। माता पार्वती की तपस्या से ज...और पढ़ें

By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Sun, 13 Sep 2026 07:02:32 PM (IST)Updated Date: Sun, 13 Sep 2026 07:02:32 PM (IST)
एक ऐसा व्रत जहां पानी पीना भी है मना! जानें इसके पीछे छिपा धार्मिक रहस्य
हरतालिका तीज 2026 पर निर्जला व्रत की पौराणिक मान्यता। (एआई जनरेटेड)

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सुहागिन महिलाओं और मनचाहा वर पाने की कामना रखने वाली कुंवारी कन्याओं के लिए हरतालिका तीज का पावन व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व इस वर्ष 14 सितंबर 2026 (सोमवार) को रखा जाएगा।

इस दिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए निर्जला (बिना अन्न और जल के) रहकर भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश जी की आराधना करती हैं।

क्यों रखा जाता है यह व्रत 'निर्जला'?

हरतालिका तीज का व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है, क्योंकि इसमें पूरे दिन और रात जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती। इसके पीछे की मुख्य वजहें इस प्रकार हैं-

  • माता पार्वती की कठिन तपस्या का प्रतीक- पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हिमालय पर अन्न-जल का त्याग करके हज़ारों वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। उनकी इस अगाध भक्ति और निर्जल साधना से प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था। उसी महान तपस्या की स्मृति में महिलाएं यह निर्जला व्रत रखती हैं।

  • पति-पत्नी के अटूट प्रेम और 16 श्रृंगार का महत्व- इस दिन महिलाएं नए वस्त्र धारण कर 16 श्रृंगार करती हैं। पूजा के दौरान माता पार्वती को सुहाग की सभी सामग्रियां अर्पित की जाती हैं। यह 16 श्रृंगार पति-पत्नी के रिश्ते की गहराई, समर्पण और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
  • हरतालिका तीज 2026: पूजा का शुभ समय (मुहूर्त)

    • प्रातःकाल शुभ पूजन मुहूर्त: 14 सितंबर 2026 को सुबह 05:00 बजे से 07:06 बजे तक पूजा का सबसे उत्तम समय रहेगा।
    • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:32 बजे से 05:19 बजे तक भी पूजन के लिए अत्यंत शुभ समय है।
    • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर के समय अभिजीत मुहूर्त में भी शिव-पार्वती की पूजा की जा सकती है।

    हरतालिका तीज व्रत के जरूरी नियम

    • अन्न-जल का त्याग: इस दिन व्रती महिलाएं पूरा दिन निर्जला उपवास रखती हैं। हालांकि, यदि स्वास्थ्य संबंधी कोई गंभीर समस्या हो, तो अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार उचित निर्णय लेना शास्त्र सम्मत है।
    • शिव-पार्वती व गणेश पूजन: स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर मिट्टी से शिव, पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाकर विधि-विधान से पूजा करें।
    • सामग्री अर्पण: माता पार्वती को लाल चुनरी व सुहाग सामग्री (सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां आदि) चढ़ाएं और भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, समी पत्र, पुष्प व जल अर्पित करें।
    • कथा श्रवण व रात्रि जागरण: हरतालिका तीज की कथा सुनना या पढ़ना अनिवार्य माना गया है। इस रात जागरण कर भजनों का कीर्तन करना विशेष फलदायी होता है।
    • सात्विकता व पारण: मन, वचन और कर्म से सात्विकता बनाए रखें। अगले दिन (15 सितंबर) सुबह सूर्योदय के बाद विधि-विधान से पूजा संपन्न करके ही व्रत का पारण किया जाता है।

    (नोट: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और पंचांगीय गणनाओं पर आधारित है।)

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