अनंत चतुर्दशी के दिन गणेशोत्सव समाप्त हो जाता है। भक्त अब, 'गणपति बाप्पा मोरिया, अगले बरस तू जल्दी आ...' के नारे के साथ अनंत चतुर्दशी के दिन बाप्पा की विदाई करते हैं। वह उन्हें नदी, तालाब और समुद्र में विसर्जित करते हैं और वर्षभर गणेशजी की कृपा बनी रहे यह आशीर्वाद ग्रहण करते हैं।
अनंत चतुर्दशी का त्योहार भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी के दिन आता है। इस वर्ष यह त्योहार 27 सितंबर यानी रविवार के दिन है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत भी रखा जाता है।
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कहा जाता है, 'यह दिन उस अंत न होने वाले सृष्टि के कर्ता निर्गुण ब्रह्मा की भक्ति का दिन है। भक्तगण लौकिक कार्य कलापों से मन को हटा कर ईश्वर भक्ति में लगाते हैं।'
इस दिन वेद-मंत्रों का जाप कर व्रती को समृति का डोरा जिसे अनंत भी कहा जाता है। अपनी बायीं भुजा में बांधना चाहिए। यह शुभ होता है।
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अनंत चतुर्दशी व्रत की पूजा दोपहर में होती है। नियत समय पर कलश की स्थापना कर इसके पास कुंकुम, केशर या हल्दी रंजित चौदह गांठों वाला अनंत रखा जाता है। इसे होम में नैवेद्य कर अनंत का पूजन किया जाता है। यह डोरा(अनंत) भगवान विष्णु को प्रसन्न करने वाला अनंत फलदायक माना गया है।
दरअसल यह व्रत धन, पुत्रादि की कामना से किया जाता है। इस दिन नवीन अनंत को धारण करन पुराने अनंत( जो पिछले वर्ष पहना हो) को निकाल देना चाहिए। अनंत में चौदह गांठें चौदह लोकों के प्रतीक हैं।
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