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Holi 2026: 3 मार्च को चंद्रग्रहण का साया, जानें क्यों 4 मार्च को खेली जाएगी धुलेंडी और क्या है सूतक का समय?

होली से आठ दिन पूर्व ग्रह अपना स्थान बदल देते हैं। इसलिए कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है।

By Digital DeskEdited By: Himadri Singh Hada
Publish Date: Tue, 24 Feb 2026 12:21:34 PM (IST)Updated Date: Tue, 24 Feb 2026 12:21:34 PM (IST)
Holi 2026: 3 मार्च को चंद्रग्रहण का साया, जानें क्यों 4 मार्च को खेली जाएगी धुलेंडी और क्या है सूतक का समय?
3 को खग्रास चंद्रग्रहण लगेगा।

HighLights

  1. आज से होलाष्टक शुरू हो गए हैं।
  2. 3 को खग्रास चंद्रग्रहण लगेगा।
  3. 8 दिन तक मांगलिक कार्यों पर रोक।

धर्म डेस्क। आज फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होलाष्टक लग गए हैं। इसलिए सनातनियों द्वारा आठ दिन तक कोई शुभ कार्य प्रारंभ नहीं किया जाएगा। प्रतिवर्ष होली से आठ दिन पूर्व ग्रह अपना स्थान बदल देते हैं। इसलिए कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है। होलाष्टक में यथासंभव दान का विधान है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे ने बताया कि होलिका दहन सोमवार, दो मार्च को किया जाएगा। होलिका दहन का मुहूर्त मध्यरात पांच बजे से तीन मार्च को सूर्योदय के पूर्व रहेगा। शाम पांच बजकर 26 मिनट से मध्यरात चार बजकर 59 मिनट तक भद्रा योग रहेगा। जिस काल में होलिका दहन नहीं किया जाता है। बुधवार को रंगों की होली खेली जाएगी।


होलाष्टक में नकारात्मक ऊर्जा और परंपराएं

होलाष्टक के आठ दिनों में नकारात्मक ऊर्जा बहुत बढ़ जाती है। होलाष्टक में नववधू अपने मायके में ही रहती है। इस समय विवाह पक्के किए जाएं तो वे टूट जाते हैं। इन आठ दिनों में धर्म-कर्म, दान पुण्य कार्य करने चाहिए। द्वापर युग में भी फाल्गुन की पूर्णिमा को श्रीकृष्ण ने पूतना का वध किया था।

इसलिए, पूतना यानी ढुंढा राक्षसी को जलाने के लिए हरियाणा, राजस्थान, पंजाब आदि क्षेत्रों में गोबर से बनी मालाएं आदि होलिका में जलाने का भी प्रचलन है। होलाष्टक का दोष सतलुज, व्यास, रावी और त्रिपुष्कर क्षेत्रों में विवाह आदि मांगलिक कार्यों का निषेध है। अन्य स्थानों में यह दोष नहीं लगता।

क्यों खेली जाएगी चार मार्च को होली?

दो मार्च को चतुर्दशी तिथि का समापन शाम 5:25 पर होगा और पूर्णिमा तिथि तीन मार्च को शाम 4:30 तक रहेगी। पूर्णिमा तिथि जिस दिन रात्रि में प्राप्त होती है, उस दिन होलिका दहन किया जाता है, इस बार दो मार्च को पूर्णिमा तिथि रात्रि में प्राप्त रहेगी परंतु भद्रा का साया शाम 5:25 से अंतरात्रि 4:59 तक रहने के कारण भद्रा के उपरांत होलिका दहन किया जाएगा।

तीन मार्च को खग्रास चंद्रग्रहण लगेगा, यह ग्रहण ग्रस्त उदितखंड चंद्रग्रहण के रूप में भी दृश्य होगा क्योंकि चंद्रोदय के समय केवल इसका मोक्ष दृश्य होगा। भारत के अलावा यह ग्रहण पूर्वी यूरोप, एशिया महाद्वीप, आस्ट्रेलिया, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, पेसिफिक, अंटार्कटिका आदि क्षेत्रों में दृश्य होगा।

चंद्रग्रहण का समय और सूतक काल

भारतीय समयानुसार खंड चंद्रग्रहण का प्रारंभ 3:19 पर होगा तथा ग्रहण का मोक्ष शाम 6:45 पर होगा। तीन मार्च को सूर्यास्त शाम 5:48 पर हो रहा है, लगभग एक घंटे तक यह ग्रहण दिखाई देगा। खंड चंद्रग्रहण की कुल अवधि तीन घंटे 28 मिनट की है, ग्रहण का मध्यकाल शाम 5:04 रहेगा।

इसका सूतक तीन मार्च को प्रातः 9:40 से प्रारंभ होगा। ग्रहण काल में होली का पर्व नहीं मनाया जाता एवं पूर्णिमा तिथि पर भी धुरेड़ी नहीं की जाती है, इस कारण से चार मार्च 2026 को धुरेड़ी होली मनाई जाएगी।

ग्रहण काल में वर्जनाएं

ग्रहण काल में मूर्ति स्पर्श भोजन शयनादि का निषेध - आचार्य पंडित सोहन शास्त्री, परमहंसी गंगा आश्रम, झोतेश्वर ने काशी पंचांग लोक विजय पंचांग एवं अन्य ग्रंथों के अनुसार बताया कि तीन मार्च 2026 तदनुसार फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा संवत 2082 को खग्रास चंद्रग्रहण दोपहर तीन बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा।

यह शाम छह बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगा। इसका सूतक काल भी भारत में प्रभावी होगा। ग्रहण काल में मूर्ति स्पर्श भोजन शयनादि का निषेध है।