मल्टीमीडिया डेस्क। कार्तिक मास का आरंभ 13 अक्टूबर से हो चुका है और यह 12 नवंबर तक चलेगा। इस मास में हिंदू धर्म के बड़े त्यौहार आते हैं, जिनको भव्य पैमाने पर मनाया जाता है। इस मास में शरद पूर्णिमा, करवा चौथ, धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भैया दूज, आंवला नवमी, देव उठावनी एकादशी, बैकुंठ चतुर्दशी और देव दीपावली जैसे बड़े त्यौहार मनाए जाते हैं। इस मास में नदी, सरोवर या पवित्र कुंडों में स्नान का बड़ा महत्व है। या जो श्रद्धालु नदी, सरोवर में स्नान करने नहीं जा सकते वो ब्रह्म मुहूर्त में या सूर्योदय के पूर्व उठकर घर पर भी स्नान कर सकते हैं। इसके लिए रातभर छत पर रखे मिट्टी या तांबे के बर्तन के जल से स्नान करें। सूर्य की किरणों से तप्त जल से स्नान भी लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि इस मास में श्रीहरी स्वयं जल में निवास करते हैं।

स्नान के संबंध में पुलस्त्य ऋषि ने कहा है कि स्नान के बगैर न तो शरीर निर्मल होता है और न ही बुद्धि। अंगिरा ऋषि ने स्नान का महत्व बताते हुए कहा कि स्नान करते समय हाथ में कुशा होना जरूरी है। समुद्र, सरोवर, पवित्र नदी, कुआं और बावड़ी जैसे प्राकृतिक जल स्रोतों में किया गया वरुण स्नान अति पवित्र माना गया है। मदन पारिजात में स्नान के बारे में बताया गया है कि कार्तिक मास में जितेन्द्रिय रहकर नित्य स्नान करने और जौ, गेहूं, मूंग, दूध-दही और घी आदि का भोजन करने से सभी पापों का क्षमण हो जाता हैं। पुण्य फल की प्राप्ति के लिए सूर्योदय से पूर्व ही स्नान करना चाहिए।

स्नान के लिए तीर्थक्षेत्रों को श्रेष्ठ माना गया है। इन तीर्थों में प्रयाग, अयोध्या, कुरुक्षेत्र और काशी को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। पवित्र नदियों और सरावरों में स्नान करना भी श्रेष्ठ माना गया है। इसलिए स्नान करते समय इस श्लोक का वाचन करना चाहिए।

गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।

नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेअस्मिन संनिधिं कुरु॥

इसके साथ ही इस श्लोक का का वाचन करना चाहिए।

आपस्त्वमसि देवेश ज्योतिषां पतिरेव च।

पापं नाशाय मे देव वाडंमन: कर्मभि: कृतम॥

इसके बाद परम पिता परमेश्वर की इस मंत्र से स्तुति करना चाहिए।

दु:खदरिद्रयनाशाय श्रीविष्णोस्तोषणाय च।

प्रात:स्नान करोम्यद्य माघे पापविनाशनम॥

स्नान समाप्त होने पर इस मंत्र का वाचन करें

सवित्रे प्रसवित्रे च परं धाम जले मम।

त्वत्तेजसा परिभ्रष्टं पापं यातु सहस्त्रधा॥

Posted By: Yogendra Sharma

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