धर्म डेस्क, इंदौर। खरमास शुरू होगा, एक माह फिर नहीं बजेंगी शहनाई, सनातन कैलेंडर के अनुसार 15 मार्च से खरमास का आगाज हो जाएगा। इसके चलते फिर एक माह तक विवाह व अन्य शुभकार्य नहीं होंगे। एक माह बाद जाकर 14 अप्रैल को खरमास का समापन होगा। तक जाकर शुभ मांगलिक कार्य शुरू होंगे। वह भी अप्रैल में मजह 5 दिन ही मुहूर्त है। जबकि मई व जून में विवाह के कोई भी मुहूर्त नहीं हैं। हिन्दू धर्म में खरमास में किसी भी तरह के शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है। इस समय केवल भगवान का पूजन और दान पुण्य करना चाहिए। इस दौरान ब्राह्मण, गुरु, गाय आदि की सेवा करना पुण्य फल देता है।
खरमास लगने के बाद शादी-विवाह जैसा मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं, क्योंकि विवाह के लिये गुरु बल की आवश्यकता होती है। इस समय नए घर या व्यवसाय शुरू नहीं करना चाहिए। खरमास के दौरान मुंडन, गृह प्रवेश और सगाई नहीं करनी चाहिए। खरमास में बेटी या बहू की विदाई नहीं करनी चाहिए। खरमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे संस्कारों का आयोजन नहीं करना चाहिए।
पंडित पंकज नरेंद्र नन्द दावे ने बताया कि पंचाग के अनुसार इस वर्ष 24 मार्च को हाेलिका दहन और 25 मार्च दिन सोमवार को होली खेली जाएगी। होली जितनी महत्पपूर्ण है उतना ही होलाष्टक भी होते हैं। इस समय ग्रहों में उग्रता का स्वभाव रहता है। इसलिए इन 8 दिनों तक विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। होलाष्टक फाल्गुन मास की अष्टमी से शुरू होता है और पूर्णिमा यानी होलिका दहन तक रहता है। इस बार अप्रैल में वहां के 5 मुहूर्त ही है। इसके बाद लगभग ढाई माह तक फिर विवाह नहीं होगें। मई और जून में शादी के लिए कोई मुहूर्त नहीं रहेगा। शास्त्रों में खरमास का महीना शुभ नहीं माना गया है। इस अवधि में मांगलिक कार्य करना प्रतिबंधित है। 15 मार्च से 14 अप्रैल 2024 तक सूर्य, मीन राशि में होंगे। इस मीन मलमास कहा जाता है। इस एक महीने की अवधि में शुभ संस्कार नहीं किए जाएंगे लेकिन चैत्र नवरात्र पर खरमास का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।