• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • धर्म
  • व्रत-त्योहार

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 21, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सूर्य के दक्षिणायन का है ऐसा महत्व, जानिए क्यों कहते हैं इसको देवताओं की रात्रि

सूर्य अपने दोनों अयन उत्तरायण और दक्षिणायन में 6-6 माह तक भ्रमण करता है।

By Yogendra SharmaEdited By: Yogendra Sharma
Publish Date: Sun, 21 Jun 2020 09:53:08 AM (IST)Updated Date: Sun, 21 Jun 2020 10:11:36 AM (IST)
सूर्य के दक्षिणायन का है ऐसा महत्व, जानिए क्यों कहते हैं इसको देवताओं की रात्रि

Suriya Dakshinayan: सूर्य का नौ ग्रहों में महत्वपूर्ण स्थान है औऱ इसकी अवस्था में छोटे से परिवर्तन का मानव जीवन पर गहरा असर होता है। सूर्य ग्रहण और उसका साल में दो बार स्थिति में परिवर्तन दो बड़ी घटनाएं होती है। इनका असर मानव जीवन पर देखा जाता है। हिंदु पंचांग में एक साल में दो अयन होते हैं। इसका मतलब यह होता है कि सूर्य एक वर्ष में अपनी स्थिति में दो बार परिवर्तन करता है। यह परिवर्तन उत्तरायण और दक्षिणायन कहलाता है। उत्तरायण में सूर्य मकर राशि से मिथुन राशि तक भ्रमण करता है, जबकि दक्षिणायन में सूर्य कर्क राशि से धनु राशि तक भ्रमण करता है। इस तरह से सूर्य के दोनों अयन 6-6 माह के होते हैं।

उत्तरायण

मकर संक्रांति के दिन सूर्य उत्तरायण होता है। इस दिन से दिन लंबे और रातें छोटी होनी शुरू हो जाती हैं। जब सूर्य उत्तरायण होता है तो उस समय से तीर्थ यात्रा और उत्सवों का प्रारंभ होता है. उत्तरायण पौष-माघ मास में होता है। सूर्य के उत्तरायण को देवताओं का दिन कहा जाता है, इसीलिए इस समय नए कार्य, गृह प्रवेश , यज्ञ, व्रत - अनुष्ठान, विवाह, मुंडन जैसे शुभ कार्य किए जाते हैं।


दक्षिणायन

दक्षिणायन का प्रारंभ वर्षाकाल में 21/22 जून से होता है। 21 जून को जब सूर्य उत्तरायण से दक्षिणायन होता है उस समय धार्मिक मान्यता के अनुसार यह देवताओं की रात्रि होती है। दक्षिणायन में रातें लंबी होना प्रारंभ हो जाती हैं और दिन छोटे होने लगते हैं। दक्षिणायन में सूर्य दक्षिण की ओर झुकाव के साथ अपनी गति करता है।

दक्षिणायन व्रत और उपवास के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है। सूर्य के दक्षिणायन में विवाह, मुंडन, उपनयन आदि शुभ कार्यों का निषेध होता हैं लेकिन तामसिक कार्यों के लिए यह समय उपयुक्त माना जाता है। सूर्य का दक्षिणायन होना इच्छाओं, कामनाओं में बढ़ोतरी करता है। इस कारण इस समय किए गए धार्मिक कर्मकांड जैसे व्रत, पूजा इत्यादि से रोग और शोक का नाश होता है।

दोनों अयन का महत्व

उत्तरायण में जप, तप और सिद्धियों के साथ विवाह समारोह, यज्ञोपवीत और गृहप्रवेश जैसे शुभ और मांगलिक प्रसंगों का प्रारंभ किया जाता है। उत्तरायण में आसमान स्वच्छ अर्थात बादलों से रहित होता है। वहीं दक्षिणायन में वर्षा, शरद और हेमंत, यह तीनों ऋतुएं होती हैं।