नवदुनिया न्यूज, सारंगपुर। सितंबर का महीना खगोलीय दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है। इस माह वर्ष 2025 का दूसरा और अंतिम पूर्ण चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। पं पवन पारीक ने बताया कि यह ग्रहण रविवार, 7 सितंबर 2025 की रात को लगेगा और भारत सहित एशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अमेरिका और फिजी तक दिखाई देगा। खगोलशास्त्रियों के अनुसार जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आकर उसकी रोशनी रोक देती है, तब चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ती है जिसे चंद्रग्रहण कहा जाता है।
पं पारीक ने बताया कि इस बार ग्रहण के समय चंद्रमा कुंभ राशि और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा तथा राहु के साथ युति कर विषयोग बनाएगा। वराहमिहिर की बृहत्संहिता के अनुसार, यदि एक ही मास में दो ग्रहण हों तो भूकंप, महामारी और राजकीय अस्थिरता जैसी परिस्थितियाँ पैदा हो सकती हैं।
बड़ी शक्तियों के बीच तनाव, जनसामान्य के रिश्तों में खटास, जलजनित समस्याएँ तथा संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका है। पं. पवन पारीक ने बताया कि यह चंद्रग्रहण कुंभ राशि और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में लगने के कारण मानसिक और सामाजिक स्तर पर विशेष प्रभाव डालेगा।
सामान्य जन को इससे डरने की बजाय आत्मचिंतन और साधना पर ध्यान देना चाहिए। ग्रहणकाल में जप, ध्यान, स्तोत्र-पाठ तथा दान करने से नकारात्मक प्रभावों का शमन होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। यह चंद्रग्रहण केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी गहन महत्व रखता है।
श्रद्धा और सावधानी, दोनों का संतुलन बनाकर इसका सामना करना ही वास्तव में मंगलकारी है। यह ग्रहण भाद्रपद पूर्णिमा को लगेगा। इसी दिन से पितृपक्ष आरंभ होता है। विद्वानों का सुझाव है कि श्राद्ध, तर्पण व पितृकार्य जैसे कर्म सूतक प्रारंभ होने से पहले ही पूरे कर लेने चाहिए।
आरंभ : 7 सितंबर, रात्रि 9:58 बजे
चरमावस्था : रात 11:00 बजे से 12:22 बजे तक
समाप्ति : 8 सितंबर, प्रात: 1:26 बजे
सूतक प्रारंभ : 7 सितंबर, दोपहर 12:57 बजे से चूँकि ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएँगे और धार्मिक अनुष्ठान स्थगित रहेंगे।