
फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि सीता जयंती के रूप में मनाई जाती है। वैसे इस वर्ष सीता जयंती 12 फरवरी के दिन है। कहते हैं इस दिन व्रत करने वाले को सुख और समृद्धि प्राप्त होती है।देश के कुछ हिस्सों में वैशाख मास के शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि को सीता जयंती मनाते हैं।
निर्णयसिंधु के अनुसार फाल्गुन माह की कृष्णपक्ष की तिथि को सीता जी का जन्म हुआ था, इसलिए इस तिथि को सीताष्टमी के रूप में उल्लेखित किया गया है। वैसे वैशाख और फाल्गुन की दोनों ही तिथियां समान रूप से मान्य हैं।
सीता शक्ति, इच्छा शक्ति तथा ज्ञान शक्ति तीनों रूपों में प्रकट होती हैं और इस तरह वे परमात्मा की शक्ति स्वरूपा हैं। वाल्मिकी रामायण तथा वेद और उपनिषद में सीता के स्वरूप का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है।
ऋग्वेद की एक स्तुति में कहा गया है कि असुरों का नाश करने वाली सीता जी आप हमारा कल्याण करें। गोस्वामी तुलसीदास ने सीता को संसार की उत्पत्ति, पालन तथा संहार करने वाली माता कहकर नमस्कार किया है।
सीता जयंती के अवसर पर भक्तगण मां सीता की उपासना करते हैं। परंपरागत ढंग से श्रद्धापूर्वक पूजा और अर्चना करते हैं। इस दिन कुछ श्रद्धालु व्रत भी रखते हैं। सीता जयंती पर व्रत रखने वालों को सौभाग्य, सुख और संतान की प्राप्ति होती है और परिवार में सुख समृद्धि बनी रहती है।