
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी छह नवंबर शुक्रवार को धनतेरस के साथ भगवान धन्वंतरि की जयंती भी मनाई जायेगी। धन और समृद्धि के प्रतीक भगवान कुबेर तथा आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि की पूजा का विशेष महत्व है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश के साथ हुआ था। उन्हें आयुर्वेद का प्रवर्तक माना जाता है। इसी कारण धनतेरस को आरोग्य और निरोगी जीवन की कामना से भी जोड़ा जाता है।
इस अवसर पर आयुर्वेद महाविद्यालय में भगवान धन्वंतरि का विधि-विधान से पूजन किया जाएगा। पूजा के दौरान धूप, दीप, पुष्प और नैवेद्य अर्पित कर अच्छे स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना की जाएगी।
भगवान धन्वंतरि को औषधियों का देवता भी माना जाता है, इसलिए पूजन में तुलसी, नीम और गिलोय जैसी औषधीय वनस्पतियों का विशेष महत्व रहेगा।
आयुर्वेद में स्वास्थ्य को केवल रोगों से मुक्ति नहीं, बल्कि शरीर, मन और जीवनशैली के संतुलन के रूप में देखा गया है। इसमें खानपान, दिनचर्या, ऋतुचर्या और औषधीय वनस्पतियों के उपयोग को विशेष स्थान दिया गया है। धन्वंतरि जयंती का अवसर भारतीय चिकित्सा परंपरा और आयुर्वेद की इसी समृद्ध विरासत को याद करने का भी है।