
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा पर 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र का शुभारंभ होगा। इस बार नवरात्र की शुरुआत रविवार को चित्रा नक्षत्र में हो रही है। श्रीमद् देवी भागवत की मान्यता के अनुसार रविवार को नवरात्र आरंभ होने पर मां दुर्गा का वाहन हाथी माना जाता है।
हाथी पर सवार होकर मां का आगमन सुख-समृद्धि, आर्थिक प्रगति और कल्याण का सूचक माना गया है। साधना और उपासना करने वाले भक्तों के लिए भी यह नवरात्र विशेष फलदायी मानी जा रहा है। ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला ने बताया श्रीमद् देवी भागवत के अनुसार नवरात्र के आरंभ वाले दिन, जो वार होता है उसी के आधार पर मां के वाहन का निर्धारण होता है।
इस बार रविवार होने के कारण मां का वाहन हाथी रहेगा। धार्मिक मान्यता में हाथी को स्थायित्व, समृद्धि और वैभव का प्रतीक माना गया है। इसलिए इस बार का नवरात्र सुख-समृद्धि की दृष्टि से अनुकूल और कल्याणकारी माना जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस अवधि में आर्थिक क्षेत्र में वृद्धि के साथ कुछ क्षेत्रों में उतार-चढ़ाव की स्थिति भी बन सकती है। भारतीय निर्यात नीति और उससे जुड़े आर्थिक पक्षों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता अनुभव हो सकती है।
इस बार किसी भी तिथि का क्षय नहीं होने से नवरात्र पूरे नौ दिन के रहेंगे। साधकों और उपासकों के लिए यह विशेष महत्व रखता है। नौ दिनों तक चलने वाला यह पर्व विशेष अनुष्ठान, साधना और संकल्पों की पूर्णता के लिए महत्वपूर्ण कालखंड माना जाएगा। नवरात्र के नौ दिनों में गृहस्थ कुल परंपरा अनुसार देवी की पूजा अर्चना करते हुए व्रत का नियमन करेंगे।
नवरात्र में देवी साधना के लिए योगों का विशेष महत्व है। इनमें अमृत सिद्धि, सर्वार्थसिद्धि व रवियोग विशेष माने गए हैं। इस बार नवरात्र के नौ दिन में 14 अक्टूबर को चतुर्थी तिथि पर अमृत सिद्धि योग, 18 अक्टूबर को सप्तमी तथा 19 अक्टूबर को महाअष्टमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग विद्यमान रहेगा। खास बात यह है कि इन तिथियों में रवियोग का संयोग भी रहेगा। इन शुभ योगों में साधना,आराधना के साथ भूमि, भवन, संपत्ति, वाहन, आभूषण, वस्त्र आदि की खरीदारी भी की जा सकती है।
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