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Mahashivratri 2026: चंद्रमा को बल देने का महा-मुहूर्त है यह शिवरात्रि, महादेव की भक्ति से कटेंगे जीवन के 'ग्रहण'

Mahashivratri 2026: ग्रहों की चाल और खगोलीय घटनाएं हमारे जीवन और भाग्य को गहराई से प्रभावित करती हैं। इस साल 15 फरवरी 2026 को आने वाली महाशिवरात्रि के...और पढ़ें

By Mohan KumarEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Thu, 12 Feb 2026 04:37:39 PM (IST)Updated Date: Thu, 12 Feb 2026 04:37:39 PM (IST)
Mahashivratri 2026: चंद्रमा को बल देने का महा-मुहूर्त है यह शिवरात्रि, महादेव की भक्ति से कटेंगे जीवन के 'ग्रहण'
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि के उपाय। (AI Generated Image)

HighLights

  1. ग्रहों की चाल भाग्य को प्रभावित करती है
  2. महाशिवरात्रि पर शिव पूजा का विधान है
  3. शिवलिंग से आत्मविश्वास में वृद्धि करता है

धर्म डेस्क। ग्रहों की चाल और खगोलीय घटनाएं हमारे जीवन और भाग्य को गहराई से प्रभावित करती हैं। इस साल 15 फरवरी 2026 को आने वाली महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय ऊर्जा के असंतुलन को ठीक करने का एक दिव्य अवसर भी है। शिव तत्व वह परम शक्ति है, जो ग्रहों के अशुभ प्रभाव को भी शुभता में बदलने का सामर्थ्य रखती है।

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, सूर्य और चंद्र ग्रहण के दौरान राहु-केतु जैसे छाया ग्रहों का प्रभाव बढ़ जाता है, जिससे प्रकृति और मानवीय मन में बेचैनी उत्पन्न होती है। जिस तरह महादेव ने हलाहल विष का पान कर सृष्टि की रक्षा की थी, ठीक उसी तरह वे ग्रहण के नकारात्मक साये और 'सूतक' जैसे दोषों को नष्ट करने में सक्षम हैं। महाशिवरात्रि की साधना भक्त के जीवन से हर प्रकार की नकारात्मकता को मिटाकर सौभाग्य का सवेरा लाती है।


राहु-केतु और मानसिक शांति

जिन जातकों की कुंडली में ग्रहण दोष होता है, उन्हें अक्सर मानसिक तनाव और कार्यों में बाधाओं का सामना करना पड़ता है। शिव पुराण के अनुसार, महादेव ही इन छाया ग्रहों के अधिपति हैं। महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का अभिषेक और 'ॐ नमः शिवाय' का निरंतर जाप राहु-केतु के दोषों को शांत कर आत्मविश्वास में वृद्धि करता है।

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चंद्रमा की पीड़ा का समाधान

चंद्रमा का सीधा संबंध हमारे मन से है, और ग्रहण के दौरान चंद्रमा सबसे अधिक पीड़ित होता है। चूंकि महादेव के मस्तक पर स्वयं चंद्रमा 'चंद्रशेखर' रूप में विराजमान हैं, इसलिए शिव की आराधना से मन को अद्भुत स्थिरता मिलती है। यदि कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो या व्यक्ति मानसिक अवसाद से जूझ रहा हो, तो शिवरात्रि का व्रत उसके लिए संजीवनी के समान कार्य करता है।