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Makar Sankranti 2026: 14 जनवरी को दोपहर 3:06 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे सूर्य

Sankranti 2026: मकर संक्रांति का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व विशेष है। इस अवसर पर स्नान, दान और पूजन का विशेष महत्व हमारे शास्त्रों में बताया गया है। ...और पढ़ें

By ramkrashna MuleEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Sat, 03 Jan 2026 09:55:35 AM (IST)Updated Date: Sat, 03 Jan 2026 10:08:27 AM (IST)
Makar Sankranti 2026: 14 जनवरी को दोपहर 3:06 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे सूर्य

HighLights

  1. इस वर्ष दो घंटे 32 मिनट पुण्य एवं एक घंटे 45 मिनट रहेगा महापुण्यकाल
  2. इस दिन स्नान, दान और पूजन के पर्व का धार्मिक स्थलों पर छाएगा उल्लास
  3. शनि मकर व कुंभ राशि के स्वामी हैं, इसे पिता और पुत्र का मिलन माना जाता है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मकर संक्रांति पर सूर्यदेव 14 जनवरी को दक्षिणायन से उत्तरायण होंगे। दोपहर तीन बजकर छह मिनट पर धनु से मकर राशि में प्रवेश के साथ स्नान-दान और पूजन का पर्व मकर संक्रांति हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। इस दिन पर्व का सामान्य पर्वकाल दोपहर 3:13 से शाम 5:45 बजे तक दो घंटे 32 मिनट रहेगा जबकि महापुण्यकाल 3:13 से शाम 4:58 बजे तक एक घंटा 45 मिनट रहेगा। सूर्य के राशि परिवर्तन का असर भी अलग-अलग राशि के जातकों के लिए अलग-अलग पड़ेगा।

काली मंदिर खजराना के पुजारी गुलशन अग्रवाल ने बताया कि मकर संक्रांति का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व विशेष है। इस अवसर पर स्नान, दान और पूजन का विशेष महत्व हमारे शास्त्रों में बताया गया है। मठ-मंदिर और आश्रमों में विशेष आयोजन होंगे। साथ ही शहर की गोशाला में गोसेवा के लिए भक्त पहुंचेंगे। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं।


शनि मकर व कुंभ राशि के स्वामी हैं इसलिए इसे पिता और पुत्र के मिलन से जुड़ा हुआ भी माना जाता है। ज्योतिर्विद देवेंद्र कुशवाह के अनुसार इस वर्ष संक्रांति का वाहन व्याघ्र व उपवाहन अश्व है। हाथ में रजत पात्र और पीतांबरी वस्त्र धारण किए हुए हैं। यह पश्चिम दिशा की ओर गमन कर रही है। पर्व पर तिल, कंबल, गुड़, खिचड़ी के दान का विशेष महत्व है।