
धर्म डेस्क। धनतेरस का पर्व इस बार छह नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। दीपोत्सव की शुरुआत के साथ ही बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। सोने-चांदी के आभूषणों से लेकर बर्तन, वाहन, इलेक्ट्रानिक्स, सजावटी सामान और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की खरीदारी के लिए लोगों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस पर नई वस्तुएं खरीदना सुख-समृद्धि और धन-धान्य में वृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस बार धनतेरस पर शुभ मालव्य राजयोग के साथ विष्कुंभ योग का भी संयोग बन रहा है।
ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा के अनुसार, धनतेरस पर मालव्य राजयोग का निर्माण हो रहा है, जिसे ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना गया है। इसके साथ हस्त नक्षत्र और विष्कुंभ योग भी रहेगा। विष्कुंभ योग को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। ऐसे में इस योग से बचकर शुभ मुहूर्त में खरीदारी करना बेहतर रहेगा।
धनतेरस पर त्रयोदशी तिथि छह नवंबर को सुबह दस बजकर इकतीस मिनट से प्रारंभ होकर सात नवंबर को सुबह दस बजकर उनचास मिनट तक रहेगी। लक्ष्मी-कुबेर पूजन के लिए शाम छह बजकर दो मिनट से रात सात बजकर सत्तावन मिनट तक का समय श्रेष्ठ रहेगा। यह समय वृषभ लग्न का भी है, जिसे स्थिर लग्न होने के कारण पूजा के लिए विशेष शुभ माना जाता है। प्रदोष काल शाम पांच बजकर उनचास मिनट से रात आठ बजकर तेईस मिनट तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह ग्यारह बजकर अड़तालीस मिनट से दोपहर बारह बजकर छप्पन मिनट तक रहेगा।
खरीदारी के लिए सुबह आठ बजकर सोलह मिनट से नौ बजकर अड़तालीस मिनट तक शुभ चौघड़िया रहेगा। सोने-चांदी और अन्य वस्तुओं की खरीदारी के लिए छह नवंबर को सुबह दस बजकर इकतीस मिनट से सात नवंबर को सुबह छह बजकर सैंतीस मिनट तक का समय बताया गया है।
धनतेरस पर सोने-चांदी के आभूषण खरीदने के साथ ही पीतल, तांबे और अन्य धातुओं के बर्तन खरीदने की भी परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं घर में समृद्धि और शुभता लेकर आती हैं। यही वजह है कि धनतेरस पर बर्तन बाजार में विशेष रौनक रहती है। इसके अलावा इलेक्ट्रानिक्स, वाहन, फर्नीचर और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की खरीदारी भी शुभ मानी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की अलग-अलग मूर्तियां खरीदना शुभ होता है। दीपावली पूजन में उपयोग होने वाले खील-बताशे खरीदने की भी परंपरा है। इन्हें सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। झाड़ू की खरीदारी भी इस दिन विशेष महत्व रखती है। मान्यता है कि झाड़ू को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है और इसे घर लाने से नकारात्मकता दूर होकर सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर लोहे, एल्युमिनियम और कांच की वस्तुएं खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है। इसी तरह चाकू, कैंची, सुई जैसी नुकीली वस्तुओं और जूते-चप्पलों की खरीदारी को भी शुभ नहीं माना जाता। हालांकि ये धार्मिक और पारंपरिक मान्यताएं हैं।
धनतेरस के अवसर पर बाजार में खरीदारी का विशेष उत्साह रहता है। इस दिन लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार छोटी-बड़ी वस्तुएं खरीदकर पर्व की खुशियों में शामिल होते हैं। सोने-चांदी के सिक्कों से लेकर मिट्टी के दीपक, पूजा सामग्री और घरेलू जरूरतों की वस्तुओं तक बाजार में हर बजट के लिए विकल्प उपलब्ध रहते हैं ।