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मार्गशीर्ष पूर्णिमा चार दिसंबर को, जीवन की सारी परेशानियां दूर करती है इस दिन की गई पूजा

Margashirsha Purnima 2025रू चार दिसंबर को सूर्यादय के बाद मार्ग शीर्ष पूर्णिमा सुबह आठ बजकर 37 मिनट से प्रारंभ हो रही है। पांच दिसंबर को सूर्योदय से प...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Sun, 30 Nov 2025 01:14:54 PM (IST)Updated Date: Sun, 30 Nov 2025 01:45:35 PM (IST)
मार्गशीर्ष पूर्णिमा चार दिसंबर को, जीवन की सारी परेशानियां दूर करती है इस दिन की गई पूजा

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मार्गशीर्ष पूर्णिमा चार दिसंबर को मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि पूर्णिमा का दिन चंद्रमा से खास संबंध रखता है, क्योंकि इस रात को चंद्रमा पूर्ण कला से निपूर्ण होता है। कहा जाता है कि चंद्रमा की यह पूर्णता पृथ्वी के वातावरण में विशेष सकारात्मक ऊर्जा लाती है। यही कारण है कि यह तिथि पूजा, दान और धार्मिक कर्मों के लिए अत्यंत शुभ मानी गई है।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन चंद्र देव के साथ-साथ भगवान विष्णु की आराधना का विशेष विधान है। पूर्णिमा पर भद्रा स्वर्ग लोक पर रहेगा। इसका पृथ्वी पर कोई प्रभाव नही पड़ेगा। पूर्णिमा को सनातन धर्म में भगवान चक्रधर व गिरिराजधरण का विशेष शृंगार होगा। गिरिराज धरण परिक्रमा भी मोक्ष एकादशी सोमवार से शुरू हो जाएंगी।


पितरों के लिए दान और तर्पण का है बड़ा महत्व

शास्त्रों के मुताबिक इस पावन तिथि पर की गई पूजा से जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती है। दुःख और बाधाएं कम होती हैं। मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। सनातन पंरपरा में मार्गशीर्ष पूर्णिमा का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है। भगवान श्रीविष्णु की कृपा बरसाने वाली मार्गशीर्ष या फिर कहें अगहन मास की पूर्णिमा इस साल चार दिसंबर को पड़ेगी। इस अवसर पर स्नान के बाद पितरों के लिए तर्पण, दान आदि करना पुण्य फलदायी होता है।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा पांच को नहीं चार को ही मनेगी

व्रत, स्नान और दान के लिए उदयातिथि की मान्यता है, लेकिन मार्गशीर्ष पूर्णिमा की उदयातिथि इस बार प्राप्त नहीं हो रही है। चार दिसंबर को सूर्यादय के बाद मार्ग शीर्ष पूर्णिमा सुबह आठ बजकर 37 मिनट से प्रारंभ हो रही है। पांच दिसंबर को सूर्योदय से पहले चार बजकर 43 मिनट पर समाप्त हो रही है। ऐसे में आपको मार्गशीर्ष पूर्णिमा के चंद्रोदय पर विचार करना चाहिए क्योंकि इस दिन पूर्णिमा के चांद को अर्घ्य दिया जाता है। इसलिए पूर्णिमा चार दिसबंर को मनाना ही फलदायी है।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर भद्रा का साया स्वर्ग लोक पर

ज्योतिषीय गणना के अनुसार मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन भद्रा का आरंभ सुबह आठ बजकर 36 मिनट पर होगा और शाम छह बजकर 41 मिनट तक जारी रहेगा। हालांकि इस तिथि पर भद्रा का प्रभाव धरती लोक पर नहीं पड़ेगा, क्योंकि उस दिन भद्रा का वास स्वर्ग लोक में रहने वाला है। इसलिए इसका कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा।