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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 08, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Mauni Amavasya 2024: इस बेहद शुभ योग में मनाई जाएगी मौनी अमावस्या, जानें पूजा के नियम और तर्पण मंत्र

पंचांग के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग में पूजा करना बहुत लाभकारी माना जाता है।

By Ekta SharmaEdited By: Ekta Sharma
Publish Date: Thu, 08 Feb 2024 03:04:55 PM (IST)Updated Date: Thu, 08 Feb 2024 03:04:55 PM (IST)
Mauni Amavasya 2024: इस बेहद शुभ योग में मनाई जाएगी मौनी अमावस्या, जानें पूजा के नियम और तर्पण मंत्र
Amavasya 2024

HighLights

  1. इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है।
  2. हर व्यक्ति को इस दिन अपने पितरों का तर्पण करना चाहिए।
  3. इस दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान किया जाता है।

धर्म डेस्क, इंदौर। Mauni Amavasya 2024: मौनी अमावस्या को हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष मौनी अमावस्या 9 फरवरी, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इसका आध्यात्मिक और धार्मिक दोनों तरह से महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है। मौनी अमावस्या का दिन पितरों के तर्पण करने के लिए भी महत्वपूर्ण माना गया है। हर व्यक्ति को इस दिन अपने पितरों का तर्पण करना चाहिए।

मौनी अमावस्या 2024 तिथि

अमावस्या तिथि की शुरुआत - 9 फरवरी, 2024 - प्रातः 08:02 से।

अमावस्या तिथि का समापन - 10 फरवरी 2024 - प्रातः 04:28 तक।

शुभ योग में मनाई जाएगी मौनी अमावस्या

पंचांग के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग में पूजा करना बहुत लाभकारी माना जाता है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 7.05 बजे शुरू होगा। यह रात 11.29 बजे समाप्त होगा।


मौनी अमावस्या पूजा नियम

  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान किया जाता है।
  • मौनी अमावस्या पर संभव हो, तो गंगा स्नान जरूर करें।
  • इस दिन पितरों के लिए घी का दीपक अवश्य जलाएं।
  • इस शुभ दिन पर पितृ तर्पण और पितृ पूजा भी की जाती है।
  • मौनी अमावस्या हवन, गायत्री जाप और भगवद गीता का पाठ करने के लिए भी उत्तम मानी जाती है।
  • इस दिन ब्राह्मणों को भोजन जरूर कराएं। ऐसा करने से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

पितरों के तर्पण मंत्र

पितृभ्य:स्वधायिभ्य:स्वधा नम:। पितामहेभ्य:स्वधायिभ्य:स्वधा नम:। प्रपितामहेभ्य:स्वधायिभ्य:स्वधा नम:

ओम आगच्छन्तु में पितर एवं ग्रहन्तु जलान्जलिम

पितृ गायत्री पाठ भी पितरों की मुक्ति के लिए किया जा सकता है।

ॐ आद्य-भूताय विद्महे सर्व-सेव्याय धीमहि। शिव-शक्ति-स्वरूपेण पितृ-देव प्रचोदयात्।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।'