
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। धनतेरस पर इस बार ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति समृद्धि का महासंयोग बना रही है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार धनतेरस के दिन विशिष्ट योग नक्षत्र में की गई खरीदी स्थायी समृद्धि प्रदान करती हैl आर्थिक उन्नति तथा वर्ष भर सुभिता के लिए इस दिन सोने चांदी के आभूषण बर्तन वही खाता पूजन के लिए लक्ष्मी जी का चित्र आदि खरीदना शुभ फलदायी माना गया हैl
ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डब्बावाला ने बताया शुक्रवार को धनतेरस पर हस्त नक्षत्र और कन्या राशि के चंद्रमा की साक्षी में आ रही हैl ज्योतिष शास्त्र में शुक्रवार को सौम्य दिवस माना जाता है, वहीं हस्त नक्षत्र को समृद्धि और संपदा की प्राप्ति का कारक नक्षत्र बताया गया है।
शुक्रवार और हस्त नक्षत्र का यह संयोग धनतेरस के महत्व को विशेष बना रहा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस योग में की गई खरीदी सुख-समृद्धि और आर्थिक उन्नति का कारक होती है।
इस बार का विशेष संयोग शुक्र और चंद्रमा की युति से भी बन रहा है। वर्तमान में शुक्र कन्या राशि में गोचर कर रहे हैं। ज्योतिष में कन्या राशि में शुक्र को नीच अवस्था का माना जाता है, लेकिन इस बार उनकी स्थिति में विशेष योग बन रहा है। हस्त नक्षत्र में कन्या राशि के चंद्रमा के साथ शुक्र की युति रहेगी।
कन्या राशि का स्वामी बुध है, जो वर्तमान में शुक्र की राशि तुला में गोचर कर रहा है। इस प्रकार शुक्र और बुध के बीच परस्पर राशि परिवर्तन की स्थिति बन रही है। ज्योतिषीय दृष्टि से इसे व्यापार, व्यवसाय, आर्थिक प्रगति और धार्मिक एवं परंपरागत कार्यों के लिए अनुकूल संयोग माना जाता है।
धनतेरस पर प्रदोष काल में पूजन और खरीदारी की विशेष परंपरा है। इस दिन सोना, चांदी, तांबा और पीतल की वस्तुएं, यंत्र, मूर्तियां, धार्मिक कार्यों में उपयोग आने वाली सामग्री, बर्तन, इलेक्ट्रिक उपकरण, वाहन, भूमि, भवन और संपत्ति की खरीदी शुभ मानी जाती है। व्यापारी वर्ग के लिए नए बहीखाते खरीदना भी शुभ परंपरा का हिस्सा है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं संपदा में वृद्धि, व्यापारिक विस्तार और आर्थिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है।
धर्मसिंधु की मान्यता के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तक प्रदोष काल में यम के निमित्त दीपदान करने की परंपरा है। पूरे माह दीपदान संभव न हो तो एकादशी से अमावस्या तक अथवा धनतेरस से दीपावली तक दीपदान किया जा सकता है। इसके लिए तिल के तेल का दीपक जलाकर यमदेव से क्षमा याचना करते हुए सद्कर्म और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रार्थना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इससे संशय, संदेह और अज्ञात भय की निवृत्ति होती है।
धनतेरस पर धन कुबेर की पूजा और कुबेर यंत्र के पंचोपचार अथवा षोडशोपचार पूजन का भी शास्त्रीय विधान बताया गया है। मान्यता है कि विधिपूर्वक पूजन से व्यापारिक, व्यावसायिक और आर्थिक प्रगति में आने वाले अवरोध दूर होते हैं तथा धन-धान्य की प्राप्ति होती है। वित्तेश्वर की आराधना को आर्थिक उन्नति से जोड़कर देखा जाता है।
दिनभर खरीदारी के कई शुभ अवसर, अभिजीत मुहूर्त भी रहेगा
-चंचल सुबह 6:30 से 8:00 बजे तक
-लाभ सुबह 8:00 से 9:30 बजे तक
-अमृत सुबह 9.30 से 11.00 बजे
-अभिजीत सुबह 11.30 से दोपहर 1.00 बजे तक
-शुभ दोपहर 12.30 से 2.00 बजे तक
-चंचल शाम 5.00 से 6.30 बजे तक
-शाम 5 बजे से 7.30 बजे तक प्रदोष कल में भगवान कुबेर देवता के पूजन तथा यमराज के निमित्त दीपदान का शुभ मुहूर्त है।
(मुहूर्त : पंडित अमर डब्बावाला के अनुसार )