चातुर्मास में करवट बदलेंगे भगवान विष्णु, बदल जाएगी आपकी किस्मत! जानें 'परिवर्तिनी एकादशी' का रहस्य और शुभ मुहूर्त
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की परिवर्तिनी एकादशी का पावन व्रत 22 सितंबर 2026 को रखा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन चातुर्मास की योग निद्रा में सो रहे भगवान...और पढ़ें
By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Wed, 16 Sep 2026 05:59:02 PM (IST)Updated Date: Wed, 16 Sep 2026 05:59:02 PM (IST)
परिवर्तिनी एकादशी 2026 की सही तिथि, पूजा के शुभ मुहूर्त और व्रत पारण का समय। (एआई जनरेटेड) धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखी जाने वाली परिवर्तिनी एकादशी (जिसे जलझूलनी या वामन एकादशी भी कहा जाता है) का विशेष धार्मिक महत्व है। इस पावन अवसर पर सर्वेश्वर भगवान श्री हरि विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
पौराणिक शास्त्रों के अनुसार, चातुर्मास की योग निद्रा के दौरान इसी दिन भगवान श्री विष्णु शयन शैय्या पर करवट बदलते हैं। इसी कारण इसे 'परिवर्तिनी एकादशी' कहा जाता है।
परिवर्तिनी एकादशी 2026: तिथि एवं पंचांग
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 21 सितंबर 2026 (सोमवार), रात्रि 08:00 बजे से।
- एकादशी तिथि समाप्त: 22 सितंबर 2026 (मंगलवार), रात्रि 09:43 बजे तक।
- व्रत की मुख्य तिथि: उदया तिथि की शास्त्रीय मान्यता के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर 2026 (मंगलवार) को ही रखा जाएगा।
परिवर्तिनी एकादशी 2026: पूजा के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:52 बजे से 05:40 बजे तक।
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:07 बजे से दोपहर 12:55 बजे तक।
- गोधूलि मुहूर्त: सायं 06:35 बजे से 06:59 बजे तक।
- सायाह्न संध्या मुहूर्त: सायं 06:35 बजे से रात्रि 07:46 बजे तक।
परिवर्तिनी एकादशी 2026: व्रत पारण का समय
एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब इसका पारण द्वादशी तिथि के भीतर और शुभ मुहूर्त में किया जाए।
- पारण की तिथि: 23 सितंबर 2026 (बुधवार)।
- पारण का शुभ समय: प्रातः 06:27 बजे से 08:53 बजे तक।
- द्वादशी तिथि समाप्ति: 23 सितंबर को रात्रि 10:50 बजे तक।
पूजा विधि एवं धार्मिक महत्व
- श्री हरि और मां लक्ष्मी का पूजन: एकादशी के दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ मां लक्ष्मी की संयुक्त पूजा करने से गृह-क्लेश दूर होते हैं और धन-धान्य में वृद्धि होती है।
- सात्विकता और दान: इस दिन व्रत रखकर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और जरूरतमंदों को फल, वस्त्र या अनाज का दान दें।
- पारण का नियम: पारण के शुभ मुहूर्त में स्नान-ध्यान के पश्चात भगवान को भोग लगाकर और ब्राह्मणों/कन्याओं को दान देकर ही व्रत खोलें।
(नोट: यह जानकारी सनातन परंपराओं, धार्मिक ग्रंथों और पंचांगीय गणनाओं पर आधारित है।)
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