किस दिन करें किसका श्राद्ध? कुंवारा पंचमी से लेकर मातृ नवमी तक, नोट कर लें पितृपक्ष 2026 की पूरी सारणी
2026 का पितृपक्ष 26 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर 10 अक्टूबर को सर्वपितृमोक्ष अमावस्या तक चलेगा। इस बार अष्टमी तिथि का क्षय होने से श्राद्ध ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 25 Sep 2026 08:02:59 PM (IST)Updated Date: Fri, 25 Sep 2026 08:04:17 PM (IST)
26 सितंबर से शुरू हो रहा महालय पक्ष। (फाइल फोटो)HighLights
- पितृपक्ष इस बार 16 की जगह 15 दिनों का होगा
- पितृपक्ष इस साल 10 अक्टूबर को खत्म हेगा
धर्म डेस्क। साल 2026 में पितृपक्ष (महालय श्राद्ध) 16 के बजाय 15 दिनों का रहेगा। इस साल पंचांगीय तिथियों के फेर में अष्टमी तिथि का क्षय होने के कारण यह स्थिति बन रही है। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ. दत्तात्रेय होस्केरे के अनुसार, 30 सितंबर 2026 को चतुर्थी और पंचमी दोनों तिथियों का श्राद्ध एक ही दिन संपन्न किया जाएगा।
ज्योतिष शास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार, श्राद्ध की तिथि का निर्धारण केवल उदया तिथि से नहीं, बल्कि मध्याह्न (कुतुप काल) में विद्यमान तिथि के आधार पर होता है। इसलिए चतुर्थी और पंचमी तिथि से संबंधित परिवार 30 सितंबर को ही अपने पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण करेंगे।
26 सितंबर से शुरुआत, 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या
- शुरुआती तिथि: भाद्रपद पूर्णिमा 26 सितंबर 2026 से पितृपक्ष का आरंभ माना जाएगा।
- प्रतिपदा श्राद्ध: 27 सितंबर से प्रतिपदा तिथि के श्राद्ध के साथ नियमित श्राद्धकर्म की शुरुआत होगी।
- समापन: 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृमोक्ष अमावस्या के साथ 15 दिवसीय पितृपक्ष का समापन होगा।
- लक्ष्मी नारायण योग: इस बार पितृपक्ष के दौरान तुला राशि में बुध और शुक्र की युति से अत्यंत शुभ 'लक्ष्मी नारायण योग' का भी निर्माण हो रहा है।
29 सितंबर को भरणी श्राद्ध और तर्पण का 'कुतुप काल'
29 सितंबर 2026 को दोपहर में भरणी नक्षत्र विद्यमान रहेगा। शास्त्रों और पुराणों में भरणी व रोहिणी नक्षत्र में किए गए तर्पण को बिहार के गयाजी में किए गए श्राद्ध के समान पुण्यदायी माना गया है।
वहीं, पितृ कर्म के लिए दिन का आठवां मुहूर्त 'कुतुप काल' सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इस साल कुतुप काल सुबह 11:36 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक रहेगा। इसी समय में पितरों को तर्पण और पिंडदान देना शास्त्रसम्मत है।
तिथिनुसार श्राद्ध की सारणी (किस दिन किसका करें श्राद्ध)
यदि स्वजनों के देहावसान की सटीक तिथि ज्ञात न हो, तो धर्मशास्त्रों में विशेष तिथियों पर श्राद्ध करने का विधान है-
- 26 सितंबर 2026 (पूर्णिमा श्राद्ध): पूर्णिमा तिथि पर देहांत हुए पितरों के लिए।
- 27 सितंबर 2026 (प्रतिपदा श्राद्ध): नाना-नानी के श्राद्ध के लिए सर्वोत्तम दिन।
- 30 सितंबर 2026 (चतुर्थी व पंचमी): चतुर्थी व पंचमी तिथि के पितरों का संयुक्त श्राद्ध।
- 1 अक्टूबर 2026 (कुंवारा पंचमी): अविवाहित स्थिति में दिवंगत हुए स्वजनों के लिए।
- 4 अक्टूबर 2026 (मातृ नवमी): माता व परिवार की दिवंगत स्त्रियों/महिलाओं का श्राद्ध।
- 6 अक्टूबर 2026 (इंदिरा एकादशी): एकादशी तिथि का विशेष और फलदायी श्राद्ध।
- 7 अक्टूबर 2026 (द्वादशी श्राद्ध): संन्यास या वैराग्य धारण करने वाले पितरों का श्राद्ध।
- 8 अक्टूबर 2026 (त्रयोदशी श्राद्ध): बच्चों व बालकों के निमित्त श्राद्ध कर्म।
- 9 अक्टूबर 2026 (चतुर्दशी श्राद्ध): अकाल मृत्यु, दुर्घटना या शस्त्र से दिवंगत हुए स्वजनों के लिए।
- 10 अक्टूबर 2026 (सर्वपितृ अमावस्या): अज्ञात तिथि वाले सभी पितरों व पूर्वजों का मोक्ष श्राद्ध।
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(नोट: यह रिपोर्ट ज्योतिषाचार्य डॉ. दत्तात्रेय होस्केरे (रायपुर) के कथनों, पंचांगीय गणनाओं और सनातन धर्मशास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है।)