• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • AI बूटकैंप
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • Mutual Funds मास्टरी
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • धर्म
  • व्रत-त्योहार

पितृ पक्ष पर 60 साल बाद बन रहा यह दुर्लभ योग, शनिश्चरी अमावस्या और गजछाया योग से मिटेंगे सभी पितृ दोष

इस साल 26 सितंबर 2026 से भाद्रपद पूर्णिमा के साथ महालय श्राद्ध पक्ष की शुरुआत हो रही है, जो 10 अक्टूबर (आश्विन अमावस्या) तक चलेगा। ज्योतिषाचार्यों के ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Akriti Tiwary
Publish Date: Thu, 24 Sep 2026 10:58:44 AM (IST)Updated Date: Thu, 24 Sep 2026 10:58:44 AM (IST)
पितृ पक्ष पर 60 साल बाद बन रहा यह दुर्लभ योग, शनिश्चरी अमावस्या और गजछाया योग से मिटेंगे सभी पितृ दोष
उज्जैन के रामघाट और सिद्धवट पर तर्पण और पिंडदान के लिए उमड़ने वाला श्रद्धालुओं का जनसैलाब। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. 26 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक रहने वाले 16 दिवसीय श्राद्ध पक्ष
  2. इस बार सर्वपितृ अमावस्या के साथ 'गजछाया योग' का महासंगम बन रहा है
  3. सिद्धवट, रामघाट और गया कोठा पर पितृ ऋण से मुक्ति के लिए लोग आएंगे

धर्म डेस्क, मध्य प्रदेश। सनातन धर्म में पितरों की आत्मा की शांति, तर्पण और पिंडदान के लिए समर्पित पितृ पक्ष (महालय श्राद्ध) 2026 की शुरुआत 26 सितंबर 2026 से होने जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस साल लगभग 60 साल के बाद ग्रहों का एक अत्यंत दुर्लभ और पावन संयोग बन रहा है। साल 1966 के बाद अब 2026 में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु और शनि ग्रहों की ऐसी विशेष स्थिति की पुनरावृत्ति हो रही है।

26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर 2026 (सर्वपितृ अमावस्या) तक चलने वाला यह 16 दिवसीय श्राद्ध पक्ष धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत फलदायी माना जा रहा है।

60 साल बाद बना दुर्लभ ग्रह संयोग और बुधादित्य योग

इस बार श्राद्ध पक्ष की शुरुआत शनिवार (26 सितंबर) से हो रही है और इसका समापन भी शनिवार (10 अक्टूबर) को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस अवधि में सूर्य का कन्या राशि में गोचर रहेगा। इसके साथ ही बुधादित्य योग, केंद्र-त्रिकोण और एकादश भाव से जुड़े कई अन्य शुभ योगों का निर्माण हो रहा है, जिससे इस दौरान किए गए तर्पण, पिंडदान, पार्वण और तीर्थ श्राद्ध का अनंत गुना फल प्राप्त होगा।


सर्वपितृ अमावस्या पर शनिश्चरी अमावस्या और 'गजछाया' का अद्भुत संयोग

आश्विन कृष्ण अमावस्या यानी 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या मनाई जाएगी। शनिवार के दिन अमावस्या पड़ने से यह 'शनिश्चरी अमावस्या' होगी। इसी दिन दुर्लभ 'गजछाया योग' का संयोग भी बन रहा है। शास्त्रों में गजछाया योग के दौरान पितरों के निमित्त किया गया श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य पितृ दोष से मुक्ति दिलाने वाला और पूर्वजों को मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है।

तिथि क्षय के बावजूद पूरे 16 दिन मनाया जाएगा श्राद्ध

पंचांगीय गणना के अनुसार इस बार पंचमी और अष्टमी तिथि का क्षय (घटत) हो रहा है। इसके बावजूद धर्मशास्त्रीय परंपरा के अनुसार श्राद्धों की कुल संख्या 16 ही रहेगी। शास्त्रों में समय के अंतर के आधार पर एक ही दिन दो तिथियों के श्राद्ध किए जाने का स्पष्ट विधान है। इसलिए श्रद्धालु अपने कुल, परिवार, गोत्र और शाखा की परंपरा के अनुसार संबंधित तिथियों पर विधि-विधान से कर्मकांड कर सकते हैं।

उज्जैन के प्रमुख पितृ तीर्थ: सिद्धवट, रामघाट और गया कोठा

श्राद्ध पक्ष के दौरान धर्मनगरी उज्जैन में शिप्रा नदी के पावन तटों पर देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है। स्कंद पुराण के अवंती खंड में उज्जैन के तीन प्रमुख स्थानों का विशेष उल्लेख मिलता है-

  • सिद्धवट घाट (प्रेत शिला तीर्थ): शिप्रा तट पर स्थित सिद्धवट के प्राचीन वटवृक्ष की स्थापना स्वयं माता पार्वती ने की थी। स्कंद पुराण में इसे ‘प्रेत शिला तीर्थ’ कहा गया है। यहाँ तर्पण और पिंडदान करने से पितरों को शांति प्राप्त होती है।
  • रामघाट (मोक्षदायिनी शिप्रा तट): उत्तरवाहिनी शिप्रा नदी के तट पर स्थित रामघाट पर पूजन, पिंडदान और हवन करने से पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है।
  • गया कोठा: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार उज्जैन का गया कोठा स्थल भी बिहार के गयाजी के समान ही पिंडदान और पितृ तर्पण के लिए परम पवित्र माना गया है।

(नोट: यह रिपोर्ट उज्जैन के ज्योतिषाचार्यों के कथनों, पंचांगीय गणनाओं, स्कंद पुराण और सनातन धर्मशास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है।)

यह भी पढ़ें- पितृ पक्ष में श्राद्ध के बाद आराम करने से नाराज होते हैं पूर्वज! भोजन करने के भी सख्त नियम