
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय राधारानी को समर्पित राधा अष्टमी का पर्व इस वर्ष 19 सितंबर को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 सितंबर को दोपहर एक बजकर दो मिनिट से शुरू होगी और 19 सितंबर को दोपहर तीन बजकर 28 बजे तक रहेगी।
उदया तिथि के आधार पर राधा अष्टमी का व्रत और पूजन 19 सितंबर को किया जाएगा। सनातन धर्म मंदिर दो दिवसीय राधाष्टमी का पर्व मनाया जायेगा।
पहले दिन शुक्रवार को ब्रज रसिक सतीश कौशिक महाराज के भजन होंगे और दूसरे दिन राधाष्टममी का भगवान श्रीकृष्ण की शक्ति पूंज राधा रानी की भव्य पालकी शोभा यात्रा निकलेगी।
धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी तिथि पर राधारानी का धरती पर अवतरण हुआ था। इसलिए इस दिन भक्त उपवास रखकर राधा-कृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
राधा अष्टमी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की साधना से भी जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि राधारानी की आराधना के बिना कृष्ण भी प्रसन्न नहीं होते।
धार्मिक परंपरा में राधारानी की पूजा दोपहर के समय करने का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन शुभ चौघड़िया सुबह 7 बजकर 39 मिनिट से नौ बजकर 11 मिनिट तक, लाभ 1 बजकर 46 मिनिट से तीन बजकर 18 बजे तक और अमृत तीन बजकर 18 मिनिट से चार बजकर 50 मिनिट तक रहेगा। शाम को लाभ चौघड़िया छह बजकर 22 मिनिट से सात बजकर 50 मिनिट तक रहेगा।
शाम के सत्र में श्री गिरिराज धरण सभागार में श्री हित भजन मंडल द्वारा संगीतमय भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर राधारानी का मनमोहक श्रृंगार कर दर्शन कराए जाएंगे। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा।
राधाष्टमी महोत्सव की शुरुआत शुक्रवार, 18 सितंबर को भजन संध्या से होगी। ब्रज रस रसिक सतीश कौशिक द्वारा श्री चक्रधर सभागार में शाम सातबजे से भजन संध्या प्रस्तुत की जाएगी।
इसमें राधा-कृष्ण के भजनों की प्रस्तुति होगी।आयोजकों के अनुसार, मंडल अध्यक्ष विजय गोयल, प्रधानमंत्री रमेश चंद्र गोयल (लल्ला), कोषाध्यक्ष राकेश बंसल ने बताया कि राधारानी का छठी महोत्सव 24 सितंबर को मनाया जाएगा।