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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 08, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Raksha Bandhan 2024: हर बार क्यों रक्षाबंधन पर रहता है भद्रा का साया, ब्रह्मा जी से जुड़ी है पौराणिक कथा

धार्मिक मान्यता है कि भद्रा काल के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं होता है। पौराणिक कथा के अनुसार, लंकापति रावण को उसकी बहन ने भद्रा काल में राखी बांधी थी ...और पढ़ें

By Ekta SharmaEdited By: Ekta Sharma
Publish Date: Thu, 08 Aug 2024 01:32:42 PM (IST)Updated Date: Thu, 08 Aug 2024 01:43:43 PM (IST)
Raksha Bandhan 2024: हर बार क्यों रक्षाबंधन पर रहता है भद्रा का साया, ब्रह्मा जी से जुड़ी है पौराणिक कथा
भद्रा, भगवान सूर्य की पुत्री और शनि देव की बहन हैं। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

HighLights

  1. भद्रा अपने भाई शनि देव की तरह ही सख्त मानी जाती हैं।
  2. ब्रह्मा जी के निर्णय पर वे निश्चितकाल में धरती पर आती हैं।
  3. बता दें कि भद्रा का संयोग कुछ खास तिथियों पर ही बनता है।

धर्म डेस्क, इंदौर। Raksha Bandhan 2024: रक्षाबंधन त्योहार को लेकर तैयारियां जोरों-शोरों पर है। इस बार रक्षाबंधन का त्योहार 19 अगस्त, सोमवार को मनाया जाने वाला है। इस बार भी रक्षाबंधन पर भद्रा का साया रहने वाला है। भद्रा काल के दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं।

भद्रा काल को अशुभ क्यों माना जाता है और हर साल रक्षाबंधन पर भद्रा काल क्यों रहता है आज हम आपको इसके बारे में बताने जा रहे हैं। आइए, जानते हैं।

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भगवान सूर्य की पुत्री हैं भद्रा

भद्रा, भगवान सूर्य की पुत्री और शनि देव की बहन हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे अपने भाई शनि देव की तरह ही सख्त हैं। इनके कठोर स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए भगवान ब्रह्मा ने उन्हें समय की गणना के एक महत्वपूर्ण अंग विष्टि करण में स्थान दिया।


इस काल को भद्राकाल माना जाता है और इसमें पूजा आदि करने की मनाही होती है। रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र के लिए भगवान से प्रार्थना करती हैं और उन्हें राखी बांधती हैं। इस कारण भद्राकाल में राखी नहीं बांधनी चाहिए। कहा जाता है कि रावण की बहन ने उसे भद्राकाल में राखी बांधी थी जिसके बाद उसका वध हो गया।

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इस कारण राखी पर होता है भद्राकाल

भद्रा का संयोग कुछ खास तिथियों पर ही बनता है जैसे-चतुर्थी, अष्टमी, एकादशी और पूर्णिमा। रक्षाबंधन सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, ऐसे में रक्षाबंधन के दिन भद्राकाल भी होता है। कहते हैं पूर्णिमा के दिन भद्रा पृथ्वी पर रहती है, इसलिए इस दौरान कोई शुभ काम नहीं करना चाहिए।

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रक्षाबंधन पर भद्रा प्रारंभ होने का समय सुबह 5.53 बजे से है, इसके बाद दोपहर 1.32 बजे तक रहेगी। यह भद्रा पाताल लोक में निवास करेगी। रक्षाबंधन पर राखी बांधने से पहले भद्रा काल का विचार जरूर किया जाता है। इसके बाद ही राखी बांधी जाती है।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।'