इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं, बहनें पूरे दिन भाई को बांध सकती हैं राखी, चंद्रग्रहण भी अदृश्य
आज (28 अगस्त 2026) देशभर में रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा रहा है। इस बार त्योहार भद्रा के साए और चंद्र ग्रहण के सूतक काल से पूरी तरह मुक्त है, जिससे बहनें पूरे दिन शुभ मुहूर्त में राखी बांध सकती हैं।
Publish Date: Fri, 28 Aug 2026 10:44:23 AM (IST)Updated Date: Fri, 28 Aug 2026 10:44:23 AM (IST)
28 अगस्त को रक्षाबंधन के पावन पर्व पर भद्रा और सूतक काल से मुक्त शुभ मुहूर्त। (फाइल फोटो)HighLights
- 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन पर भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा
- भद्रा 27 अगस्त की रात 09:32 बजे ही समाप्त हो चुकी है
- साल का आंशिक चंद्र ग्रहण भारत में अदृश्य होने रहा है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज (28 अगस्त) भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष रक्षाबंधन पर भद्रा का कोई साया नहीं रहेगा, क्योंकि भद्रा 27 अगस्त की रात 09:32 बजे ही समाप्त हो चुकी है। इसके अलावा, आज लगने वाला आंशिक चंद्रग्रहण भारत में अदृश्य रहने के कारण इसका सूतक काल या कोई धार्मिक प्रभाव मान्य नहीं होगा।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, बहनें पूरे दिन बिना किसी संशय के शुभ मुहूर्त में भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र (राखी) बांध सकती हैं।
तिथि और खगोलीय संयोग
- पूर्णिमा तिथि: श्रावण शुक्ल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 09:08 बजे शुरू होकर 28 अगस्त शुक्रवार को सुबह 09:48 बजे तक रहेगी। 'उदयातिथि' की मान्यता के अनुसार रक्षाबंधन का पर्व आज मनाया जा रहा है।
- चंद्रग्रहण का समय व दृश्यता: गुफा मंदिर के ज्योतिषाचार्य पंडित लेखराज शर्मा के अनुसार, 28 अगस्त को आंशिक चंद्रग्रहण सुबह 06:53 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा।
- कहां दिखाई देगा: यह ग्रहण अफ्रीका, यूरोप, उत्तर व दक्षिण अमेरिका और पश्चिमी एशिया में दिखाई देगा। भारत में दिखाई न देने के कारण यहाँ सूतक काल प्रभावी नहीं होगा।
- विशेष संयोग: इस सावन पूर्णिमा पर 'ब्लूमून' का खगोलीय संयोग भी बन रहा है।
आज राखी बांधने के शुभ मुहूर्त
सामान्य शुभ मुहूर्त- सुबह 05:57 बजे से 09:48 बजे तक
लाभ-उन्नति मुहूर्त- सुबह 07:33 बजे से 09:10 बजे तक
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त- सुबह 09:10 बजे से 10:46 बजे तक
(नोट: ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, पूर्णिमा तिथि में सुबह का समय राखी बांधने के लिए विशेष रूप से उत्तम और फलदायी माना गया है।)