Rishi Panchami 2026: 16 सितंबर तक रहेगी ऋषि पंचमी, होगी सप्तऋषियों की पूजा
उपंचमी तिथि 15 सितंबर को सुबह सात बजकर44 बजे शुरू होगी और 16 सितंबर को सुबह आठ बजकर 59 मिनिट बजे तक रहेगी। ऋषि पंचमी की पूजा दोपहर में पंचमी तिथि के व...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 15 Sep 2026 12:20:22 PM (IST)Updated Date: Tue, 15 Sep 2026 01:45:30 PM (IST)
ऋषि पंचमीHighLights
- दोपहर में होगी सप्तऋषियों की पूजा।
- शुद्धि और प्रायश्चित से जुड़ा है पर्व।
- महिलाओं के लिए धार्मिक महत्व।
धर्म डेस्क। सनातनी परंपरा के अनुसार ऋषि पंचमी का पर्व शुद्धि, प्रायश्चित और सप्तऋषियों के प्रति श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर सप्तऋषियों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। ऋषि पंचमी का पर्व 15 सितंबर मंगलवार को मनाया जाएगा।कुछ लोग ऋषि पंचमी का व्रत 16 सितंबर को भी रखेंगे
उपंचमी तिथि 15 सितंबर को सुबह सात बजकर44 बजे शुरू होगी और 16 सितंबर को सुबह आठ बजकर 59 मिनिट बजे तक रहेगी। ऋषि पंचमी की पूजा दोपहर में पंचमी तिथि के विद्यमान रहने पर करने का विधान है। इसलिए 15 सितंबर को सुबह 11बजकर दो मिनिट बजे से दोपहर साढ़े बारह बजे बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा।
सप्तऋषियों की होती है पूजा
- धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन सप्तऋषि कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ का पूजन किया जाता है।
- व्रती महिलाएं प्रात: स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल पर सप्तऋषियों की प्रतिमा या चित्र स्थापित करती हैं।
- इसके बाद गंगाजल, अक्षत, पुष्प, फल, नैवेद्य और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर व्रत की कथा का श्रवण किया जाता है।
- पूजा के बाद आरती कर परिवार की सुख-शांति और मंगल की कामना की जाती है।
Rishi Panchami 2019: ऋषि पंचमी का व्रत करने से महिलाओं को माहवारी के दोष से मिलती है मुक्ति
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शुद्धि और प्रायश्चित का पर्व
- भागतचार्य मनोज शास्त्री ने बताया कि ऋषि पंचमी का व्रत विशेष रूप से महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।
- परंपरागत मान्यता में इसे शारीरिक और धार्मिक शुद्धि तथा जाने-अनजाने हुई त्रुटियों के प्रायश्चित से जोड़ा गया है। व्रत के दौरान संयम और ब्रह्मचर्य का पालन करने की परंपरा है।
- श्रद्धालु इस दिन सप्तऋषियों का स्मरण कर अपने जीवन में सदाचार, संयम और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं।
- मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत एवं पूजन करने से नकारात्मकता दूर होती है।
- जीवन में सुख-शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि ऋषि पंचमी को महिलाओं के बीच विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।