
धर्म डेस्क। सर्व पितृ अमावस्या को महालय अमावस्या भी कहते हैं। सर्व पितृ अमावस्या के दिन सभी पितरों को पूरी श्रद्धा से विदाई दी जाती है। इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है और शास्त्रों के अनुसार दान-पुण्य किया जाता है। जिन लोगों को अपने पितरों की तारीख नहीं पता होती, उनका श्राद्ध उसी दिन किया जाता है। तो चलिए देखते हैं सर्व पितृ अमावस्या की तारीख और महत्व।
हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का खास महत्व है। पितृ पन्द्रह दिनों का समय होता है। यह भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर सर्व पितृ अमावस्या के दिन खत्म होता है। इस अमावस्या की खास बात यह है कि इस दिन जिन पितरों की श्राद्ध तिथि पता नहीं होती, उनका श्राद्ध कर्म इसी अमावस्या को किया जाता है।
इस दिन उन सभी की पूजा की जाती है। यह अमावस्या पितरों के लिए ज़रूरी मानी जाती है। इस दिन कई धार्मिक पूजा-पाठ और उपाय किए जाते हैं। यह दिन पितरों के दोष दूर करने के लिए भी खास माना जाता है। आइए देखते हैं सर्वपितृ अमावस्या कब है और इस अमावस्या का महत्व क्या है।
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सर्वपितृ अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर को रात 9.36 बजे शुरू होगी और 10 अक्टूबर को रात 9.19 बजे तक रहेगी। ऐसे में उदय तिथि के हिसाब से सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को मानी जाएगी।