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18 या 19 सितंबर? इस साल कब है राधा रानी की अष्‍टमी? शुभ मुहूर्त, व्रत और पूजा विधि देखें

राधा अष्टमी 19 सितंबर, 2026 को है, जबकि अष्टमी तिथि 18 सितंबर से शुरू होकर 19 सितंबर तक रहेगी। बताए गए पंचांग के अनुसार मुख्य पूजा 19 सितंबर को है।

By Digital DeskEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Thu, 17 Sep 2026 01:04:57 PM (IST)Updated Date: Thu, 17 Sep 2026 01:24:05 PM (IST)
18 या 19 सितंबर? इस साल कब है राधा रानी की अष्‍टमी? शुभ मुहूर्त, व्रत और पूजा विधि देखें
राधा अष्‍टमी 2026

HighLights

  1. राधा अष्टमी श्री राधा के प्रकट होने का दिन है।
  2. राधा, कृष्ण से जुड़ी वैष्णव परंपराओं में स्थान है।
  3. भक्त यह दिन व्रत, भजन रीति-रिवाजों से मनाते हैं।

धर्म डेस्‍क। राधा अष्टमी, जिसे राधाष्टमी या राधा जयंती के नाम से भी जाना जाता है, शनिवार, 19 सितंबर, 2026 को मनाई जाएगी। यह त्योहार राधा रानी के जन्म दिवस या जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है और हिंदू महीने भाद्रपद में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ता है। यह त्योहार खास तौर पर बरसाना और बड़े ब्रज क्षेत्र से जुड़ा है।

नई दिल्ली पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 18 सितंबर को दोपहर लगभग 1:00 बजे शुरू होगी और 19 सितंबर को दोपहर लगभग 3:26 बजे खत्म होगी। इसलिए राधा अष्टमी का मुख्य अनुष्ठान 19 सितंबर को होगा। बताए गए पंचांग में राधा अष्टमी पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाने वाला मध्याह्न काल, सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:27 बजे के बीच है। सही समय जगह के हिसाब से अलग हो सकता है। ये समय बताए गए भारतीय पंचांग पर आधारित हैं और शहर और हिसाब के तरीके के हिसाब से थोड़े अलग हो सकते हैं।


राधा जयंती क्यों मनाई जाती है?

राधा अष्टमी श्री राधा के प्रकट होने का दिन है, जिनका राधा और कृष्ण से जुड़ी वैष्णव परंपराओं में खास स्थान है। भक्त इस दिन प्रार्थना, व्रत, भजन और मंदिर के रीति-रिवाजों के साथ मनाते हैं। इस त्योहार का बरसाना से खास तौर पर गहरा कनेक्शन है, जिसे पारंपरिक रूप से राधा का जन्मस्थान माना जाता है। यह त्योहार वृंदावन, मथुरा, नंदगांव और ब्रज क्षेत्र के दूसरे हिस्सों में भी मनाया जाता है। कई भक्तों के लिए, यह मौका घर पर बड़े-बड़े जश्न मनाने से ज़्यादा भक्ति, प्रार्थना और राधा कृष्ण को याद करने से जुड़ा होता है।

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राधा अष्टमी 2026 व्रत: व्रत कैसे रखें

जो भक्त राधा अष्टमी का व्रत रखते हैं, वे आम तौर पर दिन की शुरुआत जल्दी नहाने और प्रार्थना से करते हैं। व्रत का तरीका परिवार की परंपरा और अपनी आदत के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है।

एक आम व्रत रूटीन में ये शामिल हो सकते हैं:

  • सुबह नहाकर साफ कपड़े पहनना।
  • पूजा की जगह की सफाई करना और राधा कृष्ण की तस्वीर या मूर्ति रखना।
  • व्रत का संकल्प लेना।
  • अपनी चुनी हुई व्रत परंपरा के अनुसार, व्रत के दौरान रेगुलर खाना न खाना।
  • फूल, फल और दूसरे जायज़ भोग चढ़ाना।
  • राधा-कृष्ण के नाम लेना और भक्ति की किताबें पढ़ना।
  • मध्याह्न के समय पूजा और आरती करना।
  • अपने परिवार या संप्रदाय की परंपरा के अनुसार व्रत तोड़ना।

हर भक्त के लिए कोई एक व्रत का तरीका नहीं होता। कुछ लोग सख्त व्रत रखते हैं, जबकि दूसरे फल, दूध या व्रत के हिसाब से खाना लेते हैं। जिन्हें सेहत की चिंता है, वे सही डॉक्टर की सलाह लेकर व्रत का सही तरीका चुन सकते हैं।

राधा अष्टमी 2026 पूजा विधि

पूजा घर पर आसान तरीके से की जा सकती है। बेसिक क्रम में पूजा की जगह की सफाई करना, राधा कृष्ण की मूर्ति या तस्वीरें रखना और पारंपरिक चीज़ें चढ़ाना शामिल हो सकता है। सबसे पहले, भक्त नहाकर पूजा की जगह को साफ़ करते हैं। फिर राधा कृष्ण के सामने एक दीया जलाया जा सकता है। परिवार की परंपरा के हिसाब से, मूर्तियों को अभिषेक के तौर पर जल या पंचामृत चढ़ाया जा सकता है।

राधा अष्टमी या राधा जयंती पर राधा रानी को क्या चढ़ाएं?

भक्त आमतौर पर राधा अष्टमी पूजा के दौरान फूल, फल, मिठाई और दूसरे शाकाहारी भोग चढ़ाते हैं। पारंपरिक पूजा में पंचामृत, धूप, दीये और श्रृंगार के लिए इस्तेमाल होने वाली चीज़ें भी शामिल हो सकती हैं। खास चढ़ावे मंदिरों, इलाकों और परिवारों के हिसाब से अलग-अलग होते हैं, इसलिए भक्त अपने घर या आस-पास के मंदिर में पारंपरिक तरीके से की जाने वाली प्रथा को अपना सकते हैं।

राधा अष्टमी 2026: याद रखने लायक ज़रूरी बातें

राधा अष्टमी 19 सितंबर, 2026 को है, जबकि अष्टमी तिथि 18 सितंबर से शुरू होकर 19 सितंबर तक रहेगी। बताए गए पंचांग के अनुसार मुख्य पूजा 19 सितंबर को है। क्योंकि हिंदू त्योहारों का समय जगह के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है, इसलिए जो भक्त किसी खास मुहूर्त के आसपास पूजा करने की प्लानिंग कर रहे हैं, उन्हें अपने शहर का लोकल पंचांग देखना चाहिए। व्रत के नियम परिवार और धार्मिक परंपरा के हिसाब से भी अलग हो सकते हैं।