• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • धर्म
  • व्रत-त्योहार

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 29, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Shardiya Navratri 2025 Day 7: सप्तमी पर करें मां कालरात्रि की पूजा, पढ़ें यह कथा; देवी बरसाएंगी कृपा

Shardiya Navratri 2025: शारदीय नवरात्र में हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की आराधना की जाती है। इन नौ दिनों में सप्तमी तिथि का विशेष महत्व है। इस...और पढ़ें

By Himadri Singh HadaEdited By: Himadri Singh Hada
Publish Date: Mon, 29 Sep 2025 09:35:07 AM (IST)Updated Date: Mon, 29 Sep 2025 09:36:05 AM (IST)
Shardiya Navratri 2025 Day 7: सप्तमी पर करें मां कालरात्रि की पूजा, पढ़ें यह कथा; देवी बरसाएंगी कृपा
सप्तमी पर करें मां कालरात्रि की पूजा।

HighLights

  1. सप्तमी पर करें मां कालरात्रि की पूजा।
  2. सप्तमी पर पढ़ें मां कालरात्रि की कथा।
  3. मां कालरात्रि की पूजा का महत्व।

धर्म डेस्क। शारदीय नवरात्र में हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की आराधना की जाती है। इन नौ दिनों में सप्तमी तिथि का विशेष महत्व है। इसे महा सप्तमी भी कहा जाता है और यह दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि को समर्पित है।

'काल' का अर्थ है मृत्यु या समय और 'रात्रि' का अर्थ है अंधकार। मां कालरात्रि को अज्ञान और अंधकार का नाश करने वाली देवी माना जाता है। उनका रूप भले ही विकराल और उग्र दिखता है, लेकिन वे सदैव अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और उन्हें आशीर्वाद देती हैं।


मां कालरात्रि की कथा (Maa Kalratri Vrat Katha)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, शुंभ और निशुंभ नामक राक्षसों ने जब तीनों लोकों में उत्पात मचाया, तो देवताओं ने मां दुर्गा से प्रार्थना की। युद्ध के दौरान रक्तबीज नामक राक्षस ने सबको भयभीत कर दिया।

रक्तबीज को वरदान था कि उसके रक्त की एक बूंद भी धरती पर गिरते ही वैसा ही एक और राक्षस उत्पन्न हो जाएगा। मां दुर्गा ने उसे मारना चाहा, लेकिन उसके रक्त से हजारों राक्षस पैदा होने लगे। तब देवी ने अपनी शक्ति से मां कालरात्रि को उत्पन्न किया।

मां कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत भयानक है - काले शरीर, बिखरे हुए केश और तीन विशाल नेत्र। उन्होंने युद्धभूमि में रक्तबीज पर आक्रमण किया और उसके रक्त की हर बूंद को जमीन पर गिरने से पहले ही अपने मुख में समा लिया। इस प्रकार, उन्होंने रक्तबीज का संहार कर तीनों लोकों को आतंक से मुक्त कराया।

मां कालरात्रि की पूजा का महत्व

मान्यता है कि मां कालरात्रि की उपासना करने से जीवन में छिपे हुए शत्रुओं का नाश होता है। भक्तों के सभी दुख और भय दूर होते हैं तथा घर में सुख-समृद्धि आती है।