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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 06, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Shattila Ekadashi 2024: षटतिला एकादशी आज, तिल का दान करने से बढ़ेगी सुख-समृद्धि, बनेंगे सभी बिगड़े काम

Shattila Ekadashi 2024: माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘षटतिला’ या ‘पापहारिणी’ कहा जाता है। इस एकादशी का व्रत करने से पापों का नाश होता है। व्रत र...और पढ़ें

By Ashish Kumar GuptaEdited By: Ashish Kumar Gupta
Publish Date: Tue, 06 Feb 2024 08:44:53 AM (IST)Updated Date: Tue, 06 Feb 2024 08:44:53 AM (IST)
Shattila Ekadashi 2024: षटतिला एकादशी आज, तिल का दान करने से बढ़ेगी सुख-समृद्धि, बनेंगे सभी बिगड़े काम

HighLights

  1. माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कहते हैं ‘षटतिला’ या ‘पापहारिणी’
  2. षटतिला एकादशी का व्रत करने से पापों का होता है नाश
  3. इस दिन तिल का दान करने से मिलता है अनंत पुण्य का फल

Shattila Ekadashi 2024: हिंदू संवत्सर के माघ मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को षटतिला एकादशी कहा जाता है। षटतिला एकादशी पर भगवान विष्णु का व्रत रखकर तिल का दान करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि तिल का दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और परिवार में सुख, समृद्धि बढ़ती है। सूर्योदय पर पड़ने वाली तिथि यानी उदया तिथि का महत्व होने से छह फरवरी को एकादशी का व्रत रखा जाएगा।

ज्योतिषाचार्य पं.योगेश तिवारी के अनुसार पांच फरवरी को शाम 5.24 से एकादशी तिथि प्रारंभ हो चुकी है, जो छह फरवरी को शाम 4.07 बजे तक रहेगी। चूंकि सूर्योदय यानी उदया तिथि को महत्व दिया जाता है, इसलिए छह फरवरी को एकादशी का व्रत रखना उत्तम है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और तिल दान करने से सुख, संपत्ति, समृद्धि की प्राप्ति होती है।


पापों का नाश करने वाली षटतिला एकादशी

भगवान श्रीकृष्ण ने पांडव पुत्र युधिष्ठिर को एकादशी का महत्व बताते हुए कहा था कि माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘षटतिला’ या ‘पापहारिणी’ कहा जाता है। इस एकादशी का व्रत करने से पापों का नाश होता है। व्रत रखकर तिल से बने हुए व्यंजन या तिल का दान करने से अनंत पुण्य फल मिलता है। षटतिला एकादशी का व्रत करने से आध्यात्मिक उन्नति होती है, जितना पुण्य कन्यादान, हजारों वर्षों की तपस्या और स्वर्ण दान से मिलता है, उससे अधिक फल षटतिला एकादशी का व्रत करने से मिलता है।

कथा प्रसंग

एक विधवा ब्राह्मणी भगवान विष्णु की भक्त थी। वह व्रत पूजन करती थी, लेकिन किसी को अन्नदान नहीं करती थी। एक दिन स्वयं भगवान विष्णु उस ब्राह्मणी के पास भिक्षा मांगने गए। ब्राह्मणी ने मिट्टी का पिंड उठाकर भगवान विष्णु के हाथों में रख दिया। भगवान विष्णु अपने धाम, बैकुंठ लौट आए। कुछ समय के बाद ब्राह्मणी की मृत्यु हो गई और वह बैकुंठ धाम पहुंची। ब्राह्मणी को एक कुटिया और एक आम का पेड़ मिला। ब्राह्मणी ने निराश होकर भगवान से उसका कारण पूछा।

भगवान विष्णु ने उत्तर दिया कि तुमने अपने जीवन में कभी अन्नदान नहीं किया था, इसलिए कुटिया प्राप्त हुई। ब्राह्मणी के उपाय पूछने पर भगवान विष्णु ने बताया कि जब देव कन्याएं आपसे मिलने आए तो द्वार तभी खोलना जब वे षटतिला एकादशी के व्रत का विधान बताएं। ब्राह्मणी ने वैसा ही किया और षटतिला एकादशी का व्रत रखा। व्रत के प्रभाव से ब्राह्मणी की कुटिया अन्न, धन से भर गई। इसीलिए, षटतिला एकादशी के दिन अन्नदान करने का महत्व माना जाता है।