Shiv Temple in MP: मध्य प्रदेश के भोजपुर में है बलुआ पत्थर से बना विशाल शिवलिंग, अद्भुत निर्माण का नमूना, जानिये इसके बारे में
प्रथम सावन सोमवार को सर्व प्रथम महारुद्राभिषेक, महाआरती के बाद भोलेनाथ का श्रंगार किया जाएगा, इसके लिए तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। भोजपुर मंदिर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ेगा। इसकी तैयारियां भी प्रशासन द्वारा की जा रही हैं, साथ ही सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस के इंतजाम रहेंगे।
Publish Date: Sun, 13 Jul 2025 09:59:22 PM (IST)
Updated Date: Sun, 13 Jul 2025 10:16:42 PM (IST)
प्रथम सावन सोमवार की पूर्व संध्या पर भोजपुर मंदिर के महंत पवन गिरी गोस्वामी के द्वारा भव्य श्रृंगार किया गया।HighLights
- रेखाचित्रों के माध्यम से मंदिर में उपयोग होने वाले पत्थरों की कटाई व जोड़ इत्यादि बनाए गए हैं।
- इसके निर्माण में 1200 कारीगर लगे थे। 1010 से 1055 ईसवी के बीच मंदिर का निर्माण हुआ है।
- इस विशेष शिव मंदिर निर्माण करने वाले मुख्य कारीगर अनंत ध्वज का नाम पत्थर में उकेरा गया है।
नवदुनिया न्यूज, मंडीदीप। भगवान भोलेनाथ की आराधना का महापर्व श्रवण मास के प्रथम सोमवार को भोजेश्वर महादेव मंदिर भोजपुर में श्रद्धालुओं का तांता लगेगा। भोलेनाथ का 15 क्विंटल फूलों से दिव्य व अलौकिक श्रंगार किया गया है। यह सनातन धर्मावलंबियों के आस्था का प्रमुख केंद्र सावन के प्रथम सोमवार को लेकर उत्तर भारत का सोमनाथ कहे जाने वाले विश्व प्रसिद्ध भोजेश्वर मंदिर को सजाया गया है।
सावन मास को लेकर यहां विशेष तैयारियां लगभग पूर्ण हो गई हैं। भोजपुर मंदिर के महंत पवन गिरी ने बताया की श्रृंगार के लिए फूल राजधानी भोपाल से बुलाए जाते हैं।
उन्होंने बताया कि मंदिर की सजावट व अलौकिक श्रंगार का कार्य हम स्वयं करते हैं। महंत जी ने यह भी बताया कि प्रथम सावन सोमवार को सर्व प्रथम महारुद्राभिषेक, महाआरती के बाद भोलेनाथ का श्रंगार किया जाएगा।
इसके लिए तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। भोजपुर मंदिर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ेगा। इसकी तैयारियां भी प्रशासन द्वारा की जा रही हैं, साथ ही सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस के इंतजाम रहेंगे।
![naidunia_image]()
जानिये भोजपुर मंदिर के बारे में
- मप्र की राजधानी भोपाल से 30 किमी दूर स्थापित भोजपुर शिव मंदिर को लेकर जो प्रमाण मौजूद हैं उससे यह दुनिया का अनूठा स्मारक बना हुआ है।
- आस्था के कारण यहां वर्षभर श्रद्धालु शिवलिंग का पूजन करने आते हैं। महाशिवरात्रि व मकर संक्रांति पर विशेष मेला लगता है। इसमें लाखों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन करने उमड़ते हैं।
- पुरातत्वीय प्रमाणों के अनुसार मालवा के शासक परमारवंशीय राजा भोज ने 11वीं शताब्दी में मंदिर का निर्माण कराया था।
- किन्ही कारणों से शिखर निर्माण का कार्य अधूरा रह गया। लेकिन मंदिर निर्माण की अद्भुत कला के कारण यह दुनिया का अजूबा स्मारक माना जाता है।
![naidunia_image]()
सबसे बड़ा प्राचीन पाषाण शिवलिंग
- मंदिर के गर्भगृह में स्थापित चमकदार बलुआ पत्थर से निर्मित 2.03 मीटर ऊंचा शिवलिंग है जो विश्व में 11वीं शताब्दी की प्राचीनता में कहीं नहीं है।
- मंदिर के बाहर लगे पुरातत्त्व विभाग के शिलालेख अनुसार इस मंदिर का शिवलिंग भारत के मंदिरों में सबसे ऊंचा एवं विशालतम शिवलिंग है।
- इस मन्दिर का प्रवेशद्वार भी किसी हिन्दू भवन के दरवाजों में सबसे बड़ा है।
![naidunia_image]()
मंदिर निर्माण के रेखाचित्र मौजूद
- मंदिर निर्माण को लेकर यहां चट्टानों पर रेखाचित्र बने हुए हैं जो कि दुनिया के किसी भी प्राचीन मंदिरों में नहीं हैं। पुरातत्वविदों का मानना है कि निर्माण के निर्माणकर्ता राजा भोज कुशल वास्तुशिल्पी थे।
- रेखाचित्रों के माध्यम से मंदिर में उपयोग होने वाले पत्थरों की कटाई व जोड़ इत्यादि बनाए गए हैं।
- इसके निर्माण में करीब 1200 कारीगर लगे थे। 1010 से 1055 ईसवी के बीच मंदिर का निर्माण हुआ है।
- मंदिर निर्माण करने वाले मुख्य कारीगर अनंत ध्वज का नाम पत्थर में उकेरा गया है।
- यहां पांच विशाल मंदिर बनाने की योजना थी। इसमें से तीन भोजपुर शिव मंदिर, पीछे जैन मंदिर, मेंदुआ मंदिर का निर्माण किया और अन्य दो मंदिरों के निर्माण की योजना रेखाचित्रों में मिलती है।
विशाल पत्थरों को शिखर तक पहुंचाने रपटा बनाया
- मंदिर का निर्माण 106 फीट लंबे, 77 फीट चौड़े, 17 फीट ऊंचे पत्थर के चबूतरे पर निर्मित है।
- मंदिर का अपूर्ण शिखर 40 फीट ऊंचे पूर्ण स्तंभों व 12 अधूरे अद्ध स्तभों पर बना हुआ है।
- मंदिर के पिछले भाग में अब भी रपटा के अवशेष है।
- इस रपटा से 35 गुणा, पांच गुणा, पांच फीट तक के लगभग 70 टन वजनी पत्थरों को शिखर तक पहुंचाया गया था।
- इस प्रकार के मंदिर निर्माण की योजना को पुरातत्व विभाग दुनिया में अनूठा मानता है।