नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। आषाढ़ माह की मासिक शिवरात्रि 4 जुलाई को है। इस बार मासिक शिवरात्रि पर बरसों बाद वॄद्धि व मृगशिरा नक्षत्र की युति बन रही है। त्रयोदशी तिथि का क्षय होने से बहुत से लोग इसी दिन गुरु प्रदोष व्रत भी रखेंगे। भगवान शिव के पूजन के लिए यह संयोग बेहद शुभ माना जा रहा है। मासिक शिवरात्रि पर आज शिवालयों में रुद्राभिषेक कर शिवभक्त व्रत रखकर पूजन करेंगे। नर्मदा किनारे व शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ेगी।
ज्योतिषाचार्य जनार्दन शुक्ला ने बताया कि आषाढ़ कृष्ण चतुर्दशी तिथि 4 जुलाई की सुबह 05.54 बजे आरम्भ होगी। यह 5 जुलाई की सुबह 04.57 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर देखा जाए तो आषाढ़ की मासिक शिवरात्रि 4 जुलाई को मनाई जाएगी।
ज्योतिर्विद शुक्ला ने बताया मि आषाढ़ की मासिक शिवरात्रि के दिन वृद्धि योग और मृगशिरा नक्षत्र है। उस दिन वृद्धि योग सुबह 7 बजे से लेकर अगले दिन प्रात: 5 बजकर 14 मिनट तक है। वहीं मृगशिरा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर अगले दिन भोर 03:54 बजे तक है।मान्यता है कि इन दोनों के संयोग में शिवपूजन का फल कई गुना मिलता है।
शिवरात्रि के दिन भद्रा लग रही है। जिसका वास स्थान स्वर्ग है। शिवरात्रि पर भद्रा का समय सुबह 5 बजकर 54 मिनट से शाम 5 बजकर 23 मिनट तक है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, स्वर्ग की भद्रा का असर धरती पर नहीं होता है।
विद्वानों के अनुसार, 4 जुलाई को मासिक शिवरात्रि पर रुद्राभिषेक के लिए शिववास है। शिववास भोजन में प्रातः 05:54 बजे तक है। उसके बाद श्मशान में है। जो 5 जुलाई को प्रातः 04:57 बजे तक रहेगा। सुख, समृद्धि और परिवार के कल्याण के लिए मासिक शिवरात्रि पर इस संयोग मे रुद्राभिषेक का उत्तम अवसर माना जाता है।