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चौथ-पंचमी का श्राद्ध एक साथ आज, दोपहर 2.55 के बाद पंचमी तिथि लगेगी

श्राद्ध पक्ष में अब घर-घर पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध, ब्राह्मण भोज और दान-दक्षिणा का सिलसिला चल रहा है। परिवारजन पितरों को श्रद्धापूर्वक जल, तिल...और पढ़ें

By Jogendra SenEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Wed, 30 Sep 2026 11:14:14 AM (IST)Updated Date: Wed, 30 Sep 2026 11:22:01 AM (IST)
चौथ-पंचमी का श्राद्ध एक साथ आज, दोपहर 2.55 के बाद पंचमी तिथि लगेगी
चौथ-पंचमी का श्राद्ध

HighLights

  1. बुधवार दोपहर 2 बजकर 55 बजे तक।
  2. इसके बाद पंचमी तिथि शुरू होगी।
  3. पंचमी का श्राद्ध गुरुवार को भी होगा।

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। पितृ पक्ष में बुधवार को चतुर्थी और पंचमी तिथि के श्राद्ध होंगे। ग्वालियर के पंचांग के अनुसार 30 सितंबर को चतुर्थी तिथि दोपहर 2:55 बजे तक रहेगी। इसके बाद पंचमी तिथि शुरू होगी, जो एक अक्टूबर गुरुवार दोपहर 12:35 बजे तक रहेगी।

तिथि के इस संयोग के कारण बुधवार को चतुर्थी के साथ पंचमी तिथि का श्राद्ध भी किया जाएगा, जबकि पंचमी तिथि का श्राद्ध गुरुवार को भी किया जा सकेगा।भागवताचार्य मनोज शास्त्री ने बताया कि पंचमी का श्राद्ध एक अक्टूबर को भी किया जा सरता है। क्योंकि श्राद्ध पक्ष पूरे 16 दिन के हैं।


श्राद्ध पक्ष में अब घर-घर पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध, ब्राह्मण भोज और दान-दक्षिणा का सिलसिला चल रहा है। परिवारजन पितरों को श्रद्धापूर्वक जल, तिल और अन्य सामग्री अर्पित कर उनके निमित्त भोजन तैयार कर रहे हैं।

सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र, अन्न और अन्य सामग्री का दान भी किया जा रहा है। धार्मिक परंपरा में जिस तिथि को किसी व्यक्ति का निधन हुआ हो, उसी तिथि में उसका श्राद्ध करने की मान्यता है।

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पटे के साथ शुरू होती है श्राद्ध की परंपरा

कई परिवारों में निधन के तीसरे वर्ष में ''''पटे'''' की परंपरा निभाई जाती है। पटे के बाद नियमित श्राद्ध की परंपरा शुरू मानी जाती है। इसके बाद हर वर्ष पितृ पक्ष में संबंधित तिथि पर पितरों का श्राद्ध किया जाता है। परिवार के लोग पितरों का स्मरण कर तर्पण करते हैं और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

गौशालाओं में पहुंच रहे श्रद्धालु

  • पितृ पक्ष में गौ-भोग को भी धार्मिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है।
  • इसके चलते आदर्श गौशाला सहित शहर की अन्य गौशालाओं में श्रद्धालु पहुंचकर गायों को हरा चारा, गुड़ और हरी सब्जियां खिला रहे हैं।
  • कोई परिवार अपने पितरों की स्मृति में गौ-भोग करा रहा है तो कोई चारे की व्यवस्था कर रहा है।
  • गौशालाओं में सुबह से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला दिखाई दे रहा है।
  • गायों को चारा और गुड़ अर्पित करने के बाद श्रद्धालु पितरों की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा।
  • इस दौरान पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध, अन्नदान और सेवा के माध्यम से श्रद्धा व्यक्त करने की परंपरा जारी रहेगी।