मल्टीमीडिया डेस्क। सूर्यदेव की उपासना का उल्लेख पौराणिक शास्त्रों में मिलता है। सूर्यनारायण की आराधना सनातन संस्कृति की प्राचीन परंपरा रही है। इसलिए शास्त्रों में सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा सृष्टि के आरंभ से रही है। प्राचीनकाल से ऋषि-मुनि और देवी-देवता भी सूर्य की उपासना करते रहे हैं। धरती के प्राणी भी सूर्य की आराधना कर उनका आभार व्यक्त करते हैं। इसलिए सूर्यदेव की पूजा कर उनको अर्घ्य देने से सभी कष्टों का नाश होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के पूर्वज सूर्यवंशी थे। नवग्रहों में सूर्य को विशेष स्थान प्राप्त है। उनको नवग्रहों का राजा कहा जाता है।
तीनों प्रहर है सूर्यपूजा का विधान
सूर्यदेव की आराधना से मानव को अक्षय फल की प्राप्ति होती है। वेदों में सूर्य को जगत की आत्मा और ईश्वर का नेत्र बताया गया है और उनको जीवन, स्वास्थ्य और शक्ति का देवता माना गया है। सूर्य की सुनहरी रोशनी से जगत का संचालन होता है। ज्योतिष के अनुसार कुंडली में पहले भाव के स्वामी माने गए हैं। सूर्य की दिन के तीनों प्रहर साधना करने का विधान शास्त्रों में बताया गया है और सूर्य को अलग-अलग समय में की गई साधना का फल भी अलग -अलग प्राप्त होता है। सूर्य की सूर्योदय के समय की गई आराधना से आरोग्य की प्राप्ति होती है। दोपहर के समय की गई उपासना से मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। संध्या के समय की गई पूजा से कुछ विशेष मनोकामना की पूर्ति होती है।
इस तरह दे सूर्य को अर्घ्य
सूर्यदेव को अर्घ्य तांबे के लोटे से देने सा विधान है। अर्घ्य देने के लिए तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें उसमें लाल फूल, कुमकुम या किसी विशेष मनोकामना को पूर्ण करने के लिए कुछ विशेष शुभ पदाथों को जल में डालकर सूर्य को अर्घ्य देने का भी विधान है। इसके साथ ही सूर्यदेव के मंत्रों का जाप करना विशेष फलदायी होता है। सूर्य को अर्घ्य देते समय इस सूर्य मंत्र का जाप करें।
एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणाध्र्य दिवाकर।।
ओम घृणि सूर्याय नमः।।
ओम ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ओम।।
सूर्य की प्रतिमा से होते हैं यह लाभ
मान्यता है कि जिन घरों में सूर्य का प्रकाश नहीं पहुंच पाता है वहां प्रतीकात्मक सूर्यदेव की मूर्ति लगाने से सूर्य संबंधी दोष दूर हो जाते हैं। घर की उत्तर दिशा में सूर्यदेव की मूर्ति या चित्र लगाने से घर में संपन्नता का वास रहता है। बच्चों के स्टडी रूम में सूर्यदेव की मूर्ति या चित्र लगाने से बच्चे एकाग्र होकर पढ़ाई करते हैं। घर के ड्राइंग रूम में सूर्यदेव की मूर्ति या चित्र लगाने से परिवार के सभी सदस्य स्वस्थ्य रहते है।
जिन घरों में सूर्य का प्रकाश ठीक से नहीं पहुंच पाता है वहां प्रतीकात्मक सूर्यदेव की मूर्ति लगानी चाहिए। लाल और पीले वस्त्रों का दान करने से सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं। उत्तर दिशा में सूर्यदेव की मूर्ति या चित्र लगाने से घर में कभी रुपये-पैसों की कमी नहीं रहती है। रसोईघर में तांबे की सूर्य प्रतिमा लगाने से अन्न की कमी नहीं आती है। दुकान या ऑफिस में सूर्य प्रतिमा लगाने से कारोबार में कभी नुकसान नही होता है।