
धर्म डेस्क। धनतेरस के पावन पर्व के साथ शुक्रवार से प्रकाश, आस्था और उल्लास के महापर्व दीपोत्सव का शुभारंभ होगा। घर-आंगन में मंगल कलश सजेगा, बाजारों में धन-धान्य और समृद्धि के प्रतीक धातुओं की चमक बिखरेगी और देवालयों में भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी तथा कुबेर देव का पूजन होगा।
धनतेरस पर आरोग्य और समृद्धि की मंगलकामना से शुरू होने वाला दीपोत्सव, दीपावली की रोशनी, गोवर्धन पूजा की प्रकृति आराधना और भाई दूज के पारिवारिक स्नेह तक छह दिनों में भारतीय परंपरा के विविध रंगों को समेटेगा।
दीपावली केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में सुख-समृद्धि, आरोग्य, पारिवारिक आत्मीयता और आध्यात्मिक चेतना का पांच दिवसीय महापर्व है। इस बार तिथियों के विशेष क्रम के कारण उत्सव छह दिनों तक चलेगा। 6 नवंबर को धनतेरस से आरंभ होकर 11 नवंबर को भाई दूज के साथ दीप महापर्व संपन्न होगा।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार धनतेरस शुक्रवार को हस्त नक्षत्र और कन्या राशि में मनाई जाएगी। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और आरोग्य का अधिष्ठाता माना गया है।
समुद्र मंथन से अमृत कलश के साथ उनके प्राकट्य की धार्मिक मान्यता है। यही कारण है कि धनतेरस पर धातु के पात्र, कलश और बर्तन खरीदने की परंपरा प्रचलित हुई। इस दिन सोना-चांदी, आभूषण, वाहन और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की खरीदारी भी शुभ मानी जाती है।

पंडित सौरभ दुबे के अनुसार शुक्रवार को धनतेरस पर खरीदारी के लिए दिन से लेकर रात्रि तक कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। इसलिए सनातनियों के पास काफी समय रहेगा। वे शुभ खरीदी कर वर्षभर आनंदित रहने का जतन कर सकेंगे।
मुहूर्त : समय
प्रातःकाल : 9:10 से 10:40 बजे
दोपहर : 12:12 से 1:44 बजे
विशेष खरीदारी : 4:21 से रात 8:57 बजे
मेष लग्न : 4:27 से 6:04 बजे
वृषभ लग्न : 6:04 से 8:00 बजे
गोधूलि बेला : 5:19 से 7:39 बजे
अभिजीत मुहूर्त : 11:25 से 12:15 बजे
चौघड़िया के अनुसार शुभ मुहूर्त सुबह 11:54 से दोपहर 1:17 बजे, चर मुहूर्त दोपहर 4:14 से शाम 5:47 बजे और लाभ मुहूर्त रात 8:37 से 10:19 बजे तक रहेगा। राहुकाल सुबह 10:31 से दोपहर 12 बजे तक रहेगा।
- छह नवंबर, शुक्रवार : धनतेरस। भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी का पूजन।
- सात नवंबर, शनिवार : नरक चतुर्दशी। अभ्यंग स्नान और दीपदान की परंपरा।
- आठ नवंबर, रविवार : दीपावली। प्रदोषकाल में महालक्ष्मी, गणेश और महाकाली पूजन।
- नौ नवंबर, सोमवार : श्राद्ध अमावस्या।
- 10 नवंबर, मंगलवार : गोवर्धन पूजन और अन्नकूट महोत्सव।
- 11 नवंबर, बुधवार : भाई दूज। भाई-बहन के स्नेह और आत्मीयता का पर्व।