
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। वेदाध्ययन के आरंभ और आत्मशुद्धि से जुड़ा श्रावणी उपाकर्म इस बार तिथि की विशेष स्थिति के कारण अलग-अलग दिन मनाया जाएगा। सामान्यतः रक्षाबंधन के साथ श्रावण पूर्णिमा को होने वाला उपाकर्म इस वर्ष पूर्णिमा तिथि के अल्पकालिक होने के यह स्थिति निर्मित हो रही है।
शुक्ल यजुर्वेदियों के लिए 27 अगस्त को जबकि कृष्ण यजुर्वेदी 28 अगस्त को नवीन यज्ञोपवित धारण करेंगे। धर्मशास्त्रीय गणना के अनुसार इस वर्ष ऐसी स्थिति लंबे समय बाद बनी है।
मध्यप्रदेश ज्योतिष एवं विद्वत परिषद के आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा वैदिक ने बताया कि पंचांग के अनुसार 27 अगस्त गुरुवार को सुबह 9.08 बजे चतुर्दशी समाप्त होकर पूर्णिमा शुरू होगी, जो 28 अगस्त शुक्रवार को सुबह 9.47 बजे तक रहेगी। इस प्रकार शुक्रवार को पूर्णिमा छह मुहूर्त से कम समय तक रहेगी।
इसी आधार पर शुक्ल यजुर्वेदियों का श्रावणी उपाकर्म 27 अगस्त को ही किया जाएगा। इस अवसर पर पुराना यज्ञोपवीत त्यागकर वैदिक विधि-विधान से नया यज्ञोपवीत धारण किया जाता है। उपाकर्म को वेदाध्ययन के पुनः आरंभ, आत्मसंस्कार और ऋषि परंपरा के स्मरण का पर्व माना जाता है।
आचार्य शिवप्रसाद तिवारी के अनुसार विभिन्न वेद शाखाओं में उपाकर्म की गणना की परंपरा अलग-अलग है। सामवेदियों और अथर्ववेदियों के लिए स्थानीय शाखा, गृह्यसूत्र तथा परंपरा के अनुसार तिथि निर्धारित होती है, इसलिए संबंधित आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दी जाती है।
28 अगस्त को रक्षा बंधन मनाया जाएगा।इस दिन पूर्णिमा तिथि सुबह 9.47 बजे तक रहेगी। शुक्रवार को भद्रा नहीं होने के कारण बहनें अपनी कुल परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ समय में भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकेंगी। इस दिन होने वाले आंशिक चंद्रग्रहण का भारत में प्रभाव नहीं माना जा रहा है, इसलिए रक्षा बंधन पर्व पर ग्रहण संबंधी सूतक आदि की बाधा नहीं होगी।
एरोड्रम रोड़ स्थित श्री श्रीविद्याधाम पर ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी गिरिजानंद सरस्वती ‘भगवन’ द्वारा स्थापित परंपरा के अनुसार महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती की प्रेरणा से श्रावणी उपाकर्म का शास्त्रोक्त अनुष्ठान वैदिक पद्धति से गुरुवार सुबह 9 बजे से आयोजित किया गया है, जिसमें लगभग एक हजार साधक भाग लेंगे। गायत्री महायज्ञ भी होगा। आश्रम परिवार के पं. दिनेश शर्मा एवं राजेन्द्र महाजन ने बताया कि श्रावणी उपाकर्म में स्वामी गिरिजानंद सरस्वती वेदवेदांग विद्यापीठ के नूतन 125 वेदपाठी एवं एक हजार साधक भाग लेंगे।
धरावरा धाम धार रोड़ पर 28 को यज्ञोपवित संस्कार होगा। महंत शुकदेवदास महाराज ने बताया कि पवित्रीकरण, आचमन, प्राणायाम, स्वस्ति वाचन, देवता नमस्कार, हेमाद्रि संकल्प, दशविध स्नान, दान, तर्पण, मार्जन, सप्तऋषि पूजन सहित विभिन्न शास्त्रोक्त क्रियाएं संपादित कराएंगे।