
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : इस बार गणेशोत्सव सामान्य 10 दिनों के बजाय 12 दिनों तक मनाया जाएगा। सोमवार को गणेश चतुर्थी के अवसर पर घरों और पूजा पंडालों में भगवान श्रीगणेश की स्थापना होगी, जबकि 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा।
इससे पहले वर्ष 2017 में भी 25 अगस्त से 5 सितंबर के बीच स्थापना से विसर्जन तक 12 दिन का उत्सव था। वहीं, सोमवार के दिन अखंड सौभाग्य के लिए महिलाएं हरतालिका तीज का निर्जला व्रत रखेंगी। इस मौके पर भगवान शिवजी के प्रिय दिन सोमवार को चित्रा नक्षत्र, ब्रह्म योग और तुला राशि में चंद्रमा रहेंगे, जिससे पर्व की महत्ता और ज्यादा बढ़ जाएगी।
गणेशोत्सव 10 की बजाय 12 दिवसीय हो जाएगा। इस बार कई तिथियों की अवधि 24 घंटे से अधिक होने के कारण चतुर्थी से चतुर्दशी तक का क्रम 14 से 25 सितंबर तक यानी पूरे 12 दिनों का हो रहा है। ज्योतिर्विदों के अनुसार हर वर्ष दोनों पर्व अलग-अलग दिन आते हैं, लेकिन लंबे समय बाद हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन मनाई जाएगी।
14 सितंबर को सूर्योदयकालीन भाद्रपद शुक्ल तृतीया और मध्याह्न व्यापिनी चतुर्थी के कारण दोनों पर्वों का संयोग बन रहा है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका व्रत किया जाता है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. निलेश व्यास के अनुसार भाद्रपद शुक्ल तृतीया, हस्त नक्षत्र, सूर्य की सिंह संक्रांति के संयोग को धर्मशास्त्रानुसार प्रधान माना गया है, किंतु मतांतर से चित्रा और स्वाती नक्षत्र का भी ग्रहण किया है। सम्प्रति हरतालिका व्रत को लेकर जनमानस में अनिर्णय की स्थिति बनी हुई है।
इस वर्ष भाद्रशुक्ल तृतीया दो दिनों तक है। प्रथम द्वितीया से युक्त है एवं अन्य चतुर्थी से युक्त है। दोनों में से किसका ग्रहण करना है? दोनों के ही पक्ष में भिन्न-भिन्न मत प्रस्तुत किये जा रहे हैं। रविवार को द्वितीया तिथि सुबह सात बजकर 09 मिनट तक है, उसके बाद तृतीया लगेगी।
इसी प्रकार सोमवार को सुबह सात बजकर सात मिनट तक तृतीया है, उसके बाद चतुर्थी लगेगी। उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर भाद्रपद शुक्ल तृतीया सोमवार 2083 तदनुसार 14 सितंबर को ही हरतालिका व्रत एवं गणेश चतुर्थी व्रतोत्सव किया जाना धर्मशास्त्र सम्मत एवं श्रेष्ठ होगा। इसके पूर्व दो सितबर 2019 को भी यही स्थिति बनी थी। जब तृतीया दो दिनों तक थी। तब भी चतुर्थी से युक्त तृतीया का ही ग्रहण किया गया था।
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