
धर्म डेस्क। धनतेरस को धन, आरोग्य और समृद्धि का पर्व माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा की जाती है। मान्यता है कि धनतेरस पर कुछ विशेष वस्तुओं की खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। सोना-चांदी से लेकर झाड़ू, नमक, खड़ा धनिया, धातु के बर्तन और पीली कौड़ी तक, हर वस्तु का अपना धार्मिक और पारंपरिक महत्व है।
1. सोना-चांदी : समृद्धि और वैभव का प्रतीक
धनतेरस पर सोना और चांदी खरीदना शुभ माना जाता है। सोना मां लक्ष्मी और वैभव का प्रतीक है, जबकि चांदी को चंद्रमा और शीतलता से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई बहुमूल्य धातुएं घर में सुख-समृद्धि और स्थायी संपन्नता का प्रतीक बनती हैं।
2. झाड़ू : दरिद्रता दूर करने की मान्यता
धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। इसे घर में लाना नकारात्मकता और दरिद्रता दूर करने तथा स्वच्छता और सकारात्मकता बनाए रखने का प्रतीक है।
3-नमक- सुख-शांति और सकारात्मकता
धनतेरस पर नमक खरीदना भी शुभ माना जाता है। लोक मान्यता के अनुसार नमक घर में बरकत और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इसे रसोई में समृद्धि बनाए रखने और परिवार में सुख-शांति का प्रतीक माना जाता है।
4. खड़ा धनिया : धन-धान्य और खुशहाली
खड़ा धनिया खरीदने की परंपरा का संबंध कृषि और समृद्धि से है। इसे धन-धान्य और अच्छी फसल का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि दिवाली पर इसकी पूजा करने के बाद इसे घर में रखना शुभ होता है। कुछ परिवारों में धनिया के बीज बोने की भी परंपरा है।
5. धातु के बर्तन : आरोग्य और संपन्नता का प्रतीक
धनतेरस पर पीतल, तांबे, कांसे और खरीदने की परंपरा है। इसका संबंध भगवान धन्वंतरि के समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट होने की मान्यता से जोड़ा जाता है। धातु के बर्तन घर में उपयोगिता, आरोग्य और संपन्नता के प्रतीक माने जाते हैं।
6- पीली कौड़ी
मां लक्ष्मी का प्रतीक: धार्मिक मान्यता के अनुसार पीली कौड़ी को माता लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है। इसे घर में रखने से सुख-समृद्धि आने की मान्यता है। धन-संपत्ति में वृद्धि: पीली कौड़ी को धन आकर्षित करने और आर्थिक बरकत का प्रतीक माना जाता है।इसके साथ ही लोह और कांच से निर्मित्त वस्तु खरीदने से बचना चाहिए