
स्पोर्ट्स डेस्क, अंबिकापुर। सरगुजा जिले के सीतापुर विकासखंड का छोटा सा गांव चलता। चारों तरफ खेतों से घिरा यह गांव अब क्रिकेट के नक्शे पर चमकने लगा है। इसी गांव के 22 साल के युवा राहुल प्रधान ने अपनी प्रतिभा के दम पर देश की सबसे बड़ी घरेलू क्रिकेट प्रतियोगिता रणजी ट्रॉफी के लिए छत्तीसगढ़ टीम में जगह बनाई है। सरगुजा के ग्रामीण अंचल से रणजी टीम में चयनित होने वाले वे संभवतः पहले खिलाड़ी हैं। इससे पहले चयनित सभी खिलाड़ी अंबिकापुर शहर से रहे हैं।

राहुल की कहानी संघर्ष, समर्पण और गांव की मिट्टी से जुड़ी प्रतिभा की कहानी है। चलता गांव में खेल प्रेमी शैलेश सिंहदेव रहते हैं, जो खुद क्रिकेट और शूटिंग के पेशेवर खिलाड़ी हैं। उन्होंने गांव के युवाओं की एक क्रिकेट टीम बनाई थी। इस टीम में राहुल के पिता घनश्याम प्रधान भी खेलते थे।
घनश्याम विशुद्ध रूप से किसान हैं, लेकिन अपने दौर में अच्छे क्रिकेटर रहे हैं। जब गांव की टीम अभ्यास करती, तो छोटा राहुल पिता के साथ मैदान में पहुंच जाता। गेंद उठाना, फील्डिंग करना, फिर धीरे-धीरे बल्ला थामना, यहीं से उसके अंदर क्रिकेट के प्रति जुनून पैदा हुआ। पिता घनश्याम ने ही उसे क्रिकेट की पहली बारीकियां सिखाईं।
शैलेश सिंहदेव ने गांव के बच्चों की भी एक टीम तैयार की। इस टीम को जिला स्तरीय शालेय क्रिकेट में खेलने का मौका मिला। राहुल इसी टीम का हिस्सा बनकर जिला और फिर राज्य स्तरीय शालेय क्रिकेट में उतरे। उनकी प्रतिभा देखकर जिला क्रिकेट संघ के विनीत विशाल जायसवाल ने उन्हें आगे बढ़ने में मदद की। राहुल धीरे-धीरे अपने प्रदर्शन से दो बार राष्ट्रीय शालेय क्रिकेट टूर्नामेंट में छत्तीसगढ़ टीम का हिस्सा बने और दोनों बार शानदार खेल दिखाया। गांव में अभ्यास के लिए शैलेश सिंहदेव ने अपने खर्च पर पिच बनवाया और नेट प्रैक्टिस की व्यवस्था कराई। राहुल अब पूरी तरह क्रिकेट को समर्पित हो गए।
सरगुजा जिला टीम से घरेलू टूर्नामेंट खेलते हुए जब छत्तीसगढ़ प्रीमियर लीग (CPL) शुरू हुआ तो चयनकर्ताओं की नजर उन पर पड़ी। बस्तर टीम से पहली बार प्रोफेशनल क्रिकेट में उतरे राहुल ने विकेटकीपर बल्लेबाज के रूप में ऐसा प्रदर्शन किया कि सबका ध्यान खींच लिया। बाएं हाथ के आक्रामक बल्लेबाज राहुल ने अंडर-23 छत्तीसगढ़ टीम में भी उम्दा प्रदर्शन किया, जिसके बाद पहली बार रणजी टीम में उनका चयन हुआ है। वे अब ट्रेनिंग कैंप में शामिल हो रहे हैं।
राहुल की प्रारंभिक शिक्षा केन मेमोरियल स्कूल सीतापुर से हुई है और उन्होंने स्नातक तक पढ़ाई की है। उनका सपना अब रणजी में शानदार प्रदर्शन कर आईपीएल और फिर भारतीय टीम का हिस्सा बनने का है। राहुल की इस उपलब्धि से चलता गांव में उत्साह का माहौल है। इस गांव से पहले भी कई खेल प्रतिभाएं निकली हैं, जिन्हें आगे बढ़ाने में शैलेश सिंहदेव का बड़ा हाथ रहा है।
शैलेश कहते हैं, अंचल में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, बस उन्हें अवसर और सुविधा चाहिए। राहुल ने साबित कर दिया कि अनुशासित और समर्पित युवा गांव से निकलकर भी बड़ा मुकाम हासिल कर सकता है। यदि शुरुआती चार रणजी मैचों में राहुल का प्रदर्शन शानदार रहा तो वे टीम के नियमित सदस्य बन सकते हैं।