
मुंबई। दो दशक से अधिक अपने मैदानी प्रदर्शन से भरपूर मनोरंजन करने के बाद मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर शुक्रवार को ट्विटर पर प्रशंसकों से रूबरू हुए। इस दौरान तेंडुलकर ने अपने पहले कोच रमाकांम आचरेकर से लेकर पसंदीदा टेनिस स्टार समेत कई प्रश्नों का सामना किया।
तेंडुलकर ने हमेशा की तरह आराम से उत्साहित प्रशंसकों के छोटे से वीडियो संदेशों में जवाब दिए। तेंडुलकर ने प्रश्नों के जवाब देने से पहले हर प्रशंसक को बधाई भी दी। तेंडुलकर की चैट से कुछ चुनिंदा प्रश्न-जवाब पर नजर डालते हैं-
प्रशंसक : क्या आज भी आपने उन सिक्कों को खजाना बना रखा है जो आचरेकर सर अभ्यास के दौरान स्टंप्स पर रखते थे?
तेंडुलकर : वह सभी सिक्के मेरे लिए स्वर्ण पदक हैं और मैंने उन्हें संभालकर रखे हैं। इससे पुरानी यादे हमेशा ताजा रहती हैं। उस समय मेरी उम्र 12 वर्ष थी। शिवाजी पार्क पर उस समय काफी अंधेरा हुआ करता था और हम मुश्किल से एक-दूसरे का चेहरा देख पाते थे। उस रोशनी में मुझे अभ्यास करते हुए 10 से 15 मिनट बल्लेबाजी करना होता था जो बड़ा चैलेंज था। मैंने उस चुनौती का आनंद उठाया। वह सिक्के हमेशा मेरे लिए विशेष रहेंगे।
प्रश्न : 2011 विश्व कप में जब धोनी ने मैच विजयी छक्का जड़ा तो आप कैसा महसूस कर रहे थे? आपने उस अनुभव का क्या आनंद लिया?
जवाब : मैं उस समय ड्रेसिंग रूम में वीरू (सहवाग) के साथ बैठा था और वह ड्रेसिंग रूम से उछलकर बालकनी में जाना चाहता था। मैंने उसे कुछ भी करने से मना किया। हमे उसी जगह बैठे रहने की जरूरत थी और तभी ड्रेसिंग रूम छोड़ना था जब मैच खत्म हो जाता। हम कई बार हाईलाइट्स देख सकते थे, लेकिन हमने ड्रेसिंग रूम नहीं छोड़ा और मुझे दर्शकों की दहाड़ से एहसास हुआ कि कुछ विशेष हो रहा है। यह मेरी जिंदगी का स्वर्णिम पल था। धोनी ने छक्का जमाया और फिर विश्व कप की ट्रॉफी उठाई।
प्रश्न : आप स्टानिस्लास वावरिंका और नोवाक जोकोविच में से किसे बेहतर खिलाड़ी मानते हैं?
जवाब : मैं टेनिस को नजदीक से फॉलो करता हूं और कई बार खेल भी चुका हूं। मेरी नजर में जोकोविच बेहतर खिलाड़ी हैं।
प्रश्न : आप इन दिनों में कैसे खेलना पसंद करते हैं?
जवाब : मैंने कुछ समय खेला, लेकिन 42 की उम्र में लगातार खेलना मुमकिन नहीं। इसलिए क्रिकेट ऑल स्टार्स का आइडिया आया और हम सभी ने सुपरस्टार खिलाडि़यों के एकसाथ खेलने का मजा लिया। मैं कुछ समय निकालकर अपने बेटे और उसके दोस्तों के साथ भी क्रिकेट खेला। इसमें बहुत मजा आया और यह टेंशन फ्री क्रिकेट रहा।
प्रश्न : संन्यास के बाद सचिन...सचिन... नारा सुनकर कैसा महसूस करते हैं?
जवाब : सचिन...सचिन... सुनना हमेशा विशेष लगता है, जब कई प्रशंसक आपको चाहते हैं और बहुत प्यार करते हैं। यह हमेशा विशेष है और मैंने अपने संन्यास के भाषण में उल्लेख किया था कि यह नारा मेरी पूरी जिंदगी में कानों में हमेशा गूंजता रहेगा।
प्रश्न : भारतीय मुक्केबाज शिवा थापा ने पूछा है कि वह रियो ओलिंपिक की तैयारी कैसे करें, विशेषतौर पर दबाव में?
जवाब : ओलिंपिक के लिए शुभकामनाएं। दबाव के बारे में चिंतित नहीं हो, सिर्फ प्रक्रिया के बारे में सोचिए और नतीजे अपने आप मिलेंगे। आपको सकारात्मक रहने और अपने मैच का आनंद उठाने की जरूरत है। अगर आप वर्तमान में जीते हैं तो दबाव हमेशा रहता है। फिर दबाव खुद अपना ध्यान रखेगा।
प्रश्न : सर्वश्रेष्ठ विदेशी मैदान जिस पर खेले हो?
जवाब : सिडनी मैदान क्योंकि मैंने वहां खूब रन बनाए हैं। 1991-92 में अपने पहले दौरे में मैंने शतक जड़ा था। सिडनी मेरे लिए अतुल्नीय है।
प्रश्न : भारतीय टीम के सबसे बड़े प्रशंसक सुधीर गौतम के बारे में क्या कहेंगे?
जवाब : 14 वर्ष पहले मेरी मुलाकात सुधीर से मुंबई में हुई। वह विशेष प्रशंसक है। वह कभी भी मुझे अपने बर्थ-डे पर विश करना नहीं भूलता और वह मेरे लिए विशेष है। आप कम ही ऐसे लोगों से मिलते हैं जो किसी चीज की उम्मीद नहीं रखते, सिर्फ अपना सबकुछ देने पर विश्वास रखते हैं। वह विशेष व्यक्ित है।
प्रश्न : अगर आप अपनी एक पारी को दोबारा जीना चाहे तो वो कौन सी होगी और क्यों?
जवाब : यह पारी इंग्लैंड के खिलाफ चेन्नई में खेली गई होगी। पहली साढ़े तीन दिन वह हम पर हावी रहे और फिर हमने पासा पलट दिया। जब हमने मैच जीता तो पूरा देश जश्न मनाने लगा जो मेरे लिए काफी मायने रखता है। यह हम सभी के लिए काफी विशेष पल था।