कपीश दुबे, इंदौर। भारतीय महिला हाकी टीम की ओलिंपिक में चर्चा कम थी। मगर गुमनाम सी खिलाड़ियों ने जब आस्ट्रेलिया जैसी दिग्गज टीम को हराया तो सभी की जुबां पर एक ही शब्द था, 'चक दे इंडिया"। पूर्व हाकी खिलाड़ी मीररंजन नेगी के जीवन पर आधारित शाह रुख खान की फिल्म 'चक दे इंडिया" ऐसी ही लड़कियों की टीम पर बनी थी। टोक्यो ओलिंपिक में भारतीय टीम के प्रदर्शन से नेगी भी उत्साहित हैं और उन्हें उम्मीद है कि यह टीम ऐसी ही खेलती रही तो पदक जीतने से कोई नहीं रोक सकता। नईदुनिया से खास चर्चा में नेगी ने कहा- इस टीम का प्रदर्शन किसी रोमांच से भरी कहानी की तरह है। लीग मैचों में औसत प्रदर्शन के बाद किसी को इस टीम से वापसी की उम्मीद नहीं थी, लेकिन इन्होंने जोरदार वापसी की। ऐसी टीम (आस्ट्रेलिया) को हराया, जिससे जीतने के बारे में हम सोचते ही नहीं थे। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि आस्ट्रेलिया की उस गोलकीपर को पेनाल्टीकार्नर पर छकाया, जिसने अभी तक पेनाल्टीकार्नर पर कोई गोल नहीं खाया था। भारतीय टीम की फिटनेस और मैदान पर गति बेहतरीन थी। गोल करने के बाद तीन क्वार्टर तक भारतीय टीम ने आस्ट्रेलिया को रोके रखा। इससे साबित होता है कि हमारा डिफेंस बहुत मजबूत रहा। हमारी गोलकीपर सविता का प्रदर्शन जोरदार रहा। उनकी जितनी तारीफ की जाए कम है।

नेगी ने कहा- यह टीम ऐसी थी, जिसपर किसी को भरोसा नहीं था। टीम की अधिकांश खिलाड़ी बहुत परेशानी वाले परिवारों से आती हैं। ऐसी बेटियों ने जो जज्बा मैदान पर दिखाया वह उत्साह के साथ भावुक करने वाला है। अब हमारा मुकाबला अर्जेंटीना से है। वह मजबूत टीम है। जिस तरह से हमने आस्ट्रेलिया को हराया, यदि वैसे ही खेले तो जीत सकते हैं। याद रखना होगा कि सेमीफाइनल हमेशा से बहुत अलग होता है। हमारी टीम यदि एकाग्रता रख सकी और आज के प्रदर्शन की तुलना में यदि 70 फीसद भी प्रदर्शन किया, तो जीतना तय है। हमारी टीम में आत्मविश्वास भरा हुआ है। विपक्षी खिलाड़ियों से गेंद छीनना, अपने खिलाड़ियों को पास देना और मैदान पर तालमेल बहुत अच्छा है।

Posted By: Navodit Saktawat