• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • खेल
  • खेल और भी

नवरात्र में खंडवा की इस बेटी के हौसले को सलाम, व्हीलचेयर पर बैठकर बैंकाक में लहराया भारत का परचम

नवरात्र में मां दुर्गा की शक्ति, साहस और संघर्ष की आराधना हो रही है। ऐसे समय में खंडवा की बेटी विशाखा पाराशर की कहानी भी शक्ति के उसी स्वरूप का अहसास ...और पढ़ें

By Manish KareEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sun, 11 Oct 2026 08:48:59 AM (IST)Updated Date: Sun, 11 Oct 2026 08:48:59 AM (IST)
नवरात्र में खंडवा की इस बेटी के हौसले को सलाम, व्हीलचेयर पर बैठकर बैंकाक में लहराया भारत का परचम
विशाखा पाराशर। -सौजन्य

HighLights

  1. स्पाइनल कार्ड इंजरी भी नहीं तोड़ सकी हिम्मत
  2. व्हीलचेयर रग्बी से बनाई नई पहचान
  3. अब पैरालंपिक तक पहुंचने का लक्ष्य

नईदुनिया प्रतिनिधि, खंडवा : नवरात्र में मां दुर्गा की शक्ति, साहस और संघर्ष की आराधना हो रही है। ऐसे समय में खंडवा की बेटी विशाखा पाराशर की कहानी भी शक्ति के उसी स्वरूप का अहसास कराती है।

स्पाइनल कार्ड इंजरी के बाद व्हीलचेयर पर आईं विशाखा ने जिंदगी से हार मानने के बजाय अपने हौसले को ताकत बनाया। आज वह व्हीलचेयर रग्बी के मैदान में अपने खेल से पहचान बना रही हैं और बैंकाक में करीब एक सप्ताह पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित प्रशिक्षण और मैत्री मैच में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

विशाखा का सफर आसान नहीं रहा। चोट के बाद जीवन की दिशा बदल गई, लेकिन उन्होंने अपने सपनों को अधूरा छोड़ने से इन्कार कर दिया। व्हीलचेयर रग्बी उनके लिए केवल खेल नहीं, बल्कि खुद को साबित करने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का जरिया बना। लगातार अभ्यास और मेहनत ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर दिलाया।


पिता का साथ, मेहनत से मजबूत हुए हौसले

विशाखा के इस सफर में उनके पिता विजय पाराशर का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। परिवार के सहयोग और अपने दृढ़ संकल्प के दम पर वह लगातार आगे बढ़ रही हैं। वर्तमान में खंडवा में ट्रेनर गौरव नामदेव के मार्गदर्शन में व्हीलचेयर रग्बी का अभ्यास कर रही हैं। उनका लक्ष्य अपने खेल को और बेहतर बनाना और भविष्य में पैरालंपिक खेलों तक पहुंचना है।

मातृशक्ति की मिसाल बनीं विशाखा

नवरात्र में विशाखा की कहानी यह संदेश देती है कि शक्ति केवल शारीरिक सामर्थ्य में नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों से लड़ने के साहस में भी होती है। उन्होंने अपनी शारीरिक चुनौती को सपनों की राह में बाधा नहीं बनने दिया। बैंकाक में भारत का प्रतिनिधित्व करना उनकी इसी जिद और मेहनत का महत्वपूर्ण पड़ाव है।

विशाखा आज उन बेटियों के लिए प्रेरणा हैं, जो मुश्किल परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को सीमित मान लेती हैं। उनका सफर बताता है कि हौसला मजबूत हो तो व्हीलचेयर भी मंजिल तक पहुंचने की राह में बाधा नहीं बनती। नवरात्र में उनकी उपलब्धि नारी शक्ति के उस रूप को सामने लाती है, जो संघर्ष से घबराता नहीं, बल्कि हर चुनौती का सामना कर आगे बढ़ता है।

यह भी पढ़ें- एशियन गेम्स में MP की 3 बेटियों का कमाल; भारतीय महिला हॉकी टीम ने जीता गोल्ड, ओलंपिक का टिकट भी पक्का