इंदौर। नगर निगम से हुए अनुबंध के मुताबिक शहर से कचरा उठाने वाली ए टू जेड कंपनी को रोजाना 150 मजदूरों की मदद से कचरा उठवाना चाहिए था लेकिन वह महज 70 मजदूरों के भरोसे काम चला रही थी। निगम प्रशासक बनते ही संभागायुक्त संजय दुबे ने यह पहली गलती पकड़ी और अफसरों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने तुरंत कंपनी की मनमानी दूर करते हुए बुधवार से कचरा उठाने की सारी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद करने के आदेश दिए हैं।

ए टू जेड कंपनी को उन्होंने कचरा परिवहन के लिए छह ट्रक और डंपर बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा जिन वाहनों में ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम नहीं लगा है, उनमें सोमवार शाम तक यह सिस्टम शुरू करने को कहा गया है। मंगलवार से इसकी मॉनीटरिंग की जाएगी। कमिश्नर ने नगर निगम से संबंधित तमाम विषयों को लेकर सोमवार को फिर बैठक ली और उसमें अधिकारियों को ये आदेश दिए। श्री दुबे ने बताया कि अनुबंध के मुताबिक कंपनी को कचरा उठाने के लिए जितने मजदूर लगाना थे, उतने अभी काम नहीं कर रहे। न नगर निगम कंपनी से यह काम करवा पा रहा है इसीलिए हालिया आदेश दिए गए हैं।

संभागायुक्त खुद ऑनलाइन

नजर सकेंगे व्यवस्था पर

संभागायुक्त ने ऐसा मोबाइल एप तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिससे हर गाड़ी के मूवमेंट पर नजर रखी जा सके और जहां नागरिक खुद कचरा पेटी का फोटो लोड कर वस्तुस्थिति भी बता सकें। इस एप के जरिये संभागायुक्त और निगमायुक्त खुद पूरी व्यवस्था पर नजर रख सकेंगे। उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि वार्डवार सभी से यह रिपोर्ट लें कि निगम की कौनसी टीम ने कब-कहां से कचरा उठाया? इससे फिजिकली सारी बातें साफ हो जाएंगी। बैठक में निगमायुक्त राकेशसिंह, अपर आयुक्त सुरेंद्र कथूरिया, उपायुक्त अभय राजनगांवकर और मुख्य स्वास्थ्य अधिकारियों के अलावा कई अफसर मौजूद थे।

निगम कर्मचारी पहनें जैकेट

श्री दुबे ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि फील्ड पर रहने वाले निगम कर्मी फ्लोरोसेंट जैकेट पहनें ताकि उनकी पहचान हो सके और यह पता चल सके कि कौनसा कर्मचारी खुद को फील्ड में बताकर मौके से गायब है।

यह भी कहा...

- यदि कचरा परिवहन में लगी गाड़ी खराब हो जाए तो उसकी जगह दूसरी गाड़ी का इंतजाम सुनिश्चित किया जाए।

- यदि कंपनी कचरा उठाने में लापरवाही करती है या समय पर नहीं उठाती तो उस पर पैनल्टी लगाई जाए।

- वार्डवार यह दायित्व दरोगा का होगा कि वह दिए गए चार्ट में यह दर्शाएगा कि कहां पेटी से कचरा उठा, कहां नहीं?